चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में कृषक बैठक: तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर, किसानों को आरटी-372 किस्म का प्रदर्शन
चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में कृषक बैठक: तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर, किसानों को आरटी-372 किस्म का प्रदर्शन
कानपुर, 07 जुलाई चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसएयूएटी) के प्रसार निदेशालय के लाल बहादुर सभागार कक्ष में शनिवार, 06 जुलाई को कृषकों की मासिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य खरीफ तिलहन फसलों को बढ़ावा देना था, जिसके तहत किसानों को तिल की नवविकसित और उन्नत प्रजाति आरटी-372 का प्रदर्शन हेतु वितरण किया गया। विश्वविद्यालय के तिलहन विभाग के प्रभारी डॉ. महक सिंह ने इस अवसर पर किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार देश में तिलहन फसल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत गंभीर है और इसके लिए विभिन्न स्तरों पर महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं।
डॉ. महक सिंह ने बैठक में उपस्थित किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों और तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से तिलहन की खेती के आर्थिक लाभों, मृदा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों और देश को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने में तिलहन के योगदान से अवगत कराया। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि उन्नत बीजों के प्रयोग, सही फसल प्रबंधन, संतुलित पोषण और कीट-रोग नियंत्रण जैसी वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर किसान तिलहन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में भी इजाफा होगा। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सरकार न केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, बल्कि कटाई उपरांत प्रबंधन और विपणन में भी किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रसार निदेशक डॉ. आर.के. यादव ने अपने संबोधन में किसानों को तिल की फसल में नवीन कृषि पद्धतियों और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यदि किसान आधुनिक कृषि विज्ञान का समावेश अपनी खेती में करते हैं, तो तिल की फसल उनके लिए अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती है और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई किस्म आरटी-372 के गुणों और इसकी उच्च उत्पादकता क्षमता के बारे में भी जानकारी दी, जिसे किसानों के खेतों पर प्रदर्शन के लिए वितरित किया गया है।
इस मासिक कृषक बैठक में विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से उपस्थित लोगों में डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. विनोद कुमार, कृषक समिति के अध्यक्ष बाबू सिंह तथा प्रगतिशील कृषक जगदीश सिंह शामिल थे। इस तरह की बैठकों से किसानों को नवीनतम कृषि जानकारी प्राप्त होती है और वे अपनी समस्याओं का समाधान भी प्राप्त कर पाते हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में नवाचार और विकास को बल मिलता है।