परिवार ही समाज की पहली पाठशाला : डॉ. श्रुति आनन्द

-ज्वाला देवी इंटर कॉलेज में सप्त शक्ति संगम कार्यक्रम

परिवार ही समाज की पहली पाठशाला : डॉ. श्रुति आनन्द

प्रयागराज, 08 नवम्बर । विद्या भारती से सम्बद्ध ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सिविल लाइन्स में शनिवार को ’’सप्तशक्ति संगम’’ नामक एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य समाज को जागृत करने वाले चार प्रमुख स्तम्भों भारतीय संस्कृति, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण और महिलाओं की सशक्त भूमिका पर गहन चिंतन-मनन करना रहा।

मुख्य अतिथि ज्वाला देवी सिविल लाइन्स प्रबंध समिति की सदस्य श्रीमती ऊषा मिश्रा ने अपने उद्बोधन में बच्चों और अभिभावकों को भारतीय मूल्यों के महत्व से अवगत कराया और दैनिक जीवन में इन सिद्धांतों को अपनाने पर ज़ोर दिया।

विशिष्ट वक्ता आर्य कन्या डिग्री कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्रुति आनन्द ने विशेष रूप से ’कुटुम्ब प्रबोधन’ और ’भारतीय संस्कृति’ पर कहा कि परिवार ही समाज की पहली पाठशाला है, जहां बच्चों में नैतिक और मानवीय मूल्यों का बीजारोपण होता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की सार्वभौमिकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सराहना की।

कटरा की सभासद श्रीमती मोनिका अग्रवाल ने ’महिलाओं की सशक्त भूमिका’ और ’पर्यावरण संरक्षण’ के विषयों पर आधुनिक युग में महिला शक्ति के अपरिहार्य योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि एक सशक्त महिला कैसे घर, समाज और राष्ट्र को नई दिशा प्रदान कर सकती है। पर्यावरण संरक्षण पर उन्होंने छात्रों को दैनिक जीवन में छोटे-छोटे प्रयासों जैसे कि जल की बचत और पाैधरोपण के माध्यम से प्रकृति की रक्षा करने के लिए प्रेरित किया।

इसके पूर्व विद्यालय के प्रधानाचार्य विक्रम बहादुर सिंह परिहार ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए विस्तृत प्रस्तावना पेश की। उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में इन विषयों के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे ये चारों शक्तियां मिलकर एक सुदृढ़ एवं समृद्ध राष्ट्र की नींव रखती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि ’संस्कार, संस्कृति और सामाजिक दायित्व’ की भावना का संचार करना भी इसका अभिन्न अंग है।

सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम ने केवल एक सभा का रूप नहीं लिया, बल्कि यह एक ’वैचारिक महाकुम्भ’ बन गया, जहां उपस्थित सभी लोगों को अपनी संस्कृति के प्रति अपने दायित्वों को समझने, परिवार में सद्भाव और अच्छे संस्कारों को पोषित करने तथा प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिली। कार्यक्रम में लगभग 200 की संख्या में माताएं एवं बहनें उपस्थित रहीं।