पुलिस अधिकारियों के अवमाननापूर्ण आचरण पर स्पष्टीकरण तलब

पुलिस अधिकारियों के अवमाननापूर्ण आचरण पर स्पष्टीकरण तलब

पुलिस अधिकारियों के अवमाननापूर्ण आचरण पर स्पष्टीकरण तलब

प्रयागराज, 10 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कन्नौज के न्यायिक अधिकारी व उनके स्टाफ के साथ पुलिस विभाग और अभियोजन पक्ष के कुछ अधिकारियों के अवमाननापूर्ण आचरण को गंभीरता से लिया है। हालांकि कोर्ट ने मामले का औपचारिक संज्ञान लेने और इसे आपराधिक अवमानना की सुनवाई करने वाली बेंच को भेजने से पहले सम्बंधित अधिकारियों को अपनी गलती सुधारने और स्पष्टीकरण देने का एक अवसर दिया है।

कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि जिन अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठे हैं, उनमें एक संयुक्त निदेशक अभियोजन भी शामिल हैं। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने नवाब सिंह यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए की है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट का ध्यान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कन्नौज के एक आदेश की ओर आकर्षित किया गया। इस आदेश के साथ संलग्न एक नोट में कुछ पुलिस अधिकारियों के व्यवहार को अनुचित और न्यायालय की गरिमा के विपरीत यानी अवमाननापूर्ण बताया गया था। इस पर अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सम्बंधित अधिकारी 16 अप्रैल को न्यायालय में उपस्थित होंगे और शपथ पत्र के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारी इन तथ्यों पर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देते हैं तो उनके विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

कोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 16 अप्रैल को सुबह 10 बजे फ्रेश केस के रूप में पेश करने का निर्देश देते हुए सम्बंधित पुलिस व अभियोजन अधिकारियों को उस दिन व्यक्तिगत रूप से या शपथ पत्र के माध्यम से अपना पक्ष रखने को कहा है।

गौरतलब है कि, कोर्ट ने कन्नौज के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के 20 सितम्बर 2025 के आदेश के साथ संलग्न नोट में पुलिस द्वारा न्यायिक अधिकारी और उनके कर्मचारियों को धमकी देकर पुलिस के पक्ष में आदेश करने के लिए मजबूर करने के संबंध में बहुत गंभीर आरोप पाए थे।