दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रांसजेंडर संशोधन कानून पर केंद्र को नोटिस जारी किया
दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रांसजेंडर संशोधन कानून पर केंद्र को नोटिस जारी किया
नई दिल्ली, 08 अप्रैल । दिल्ली उच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार से संबंधित कानून में संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को करने का आदेश दिया।
याचिका वकील डॉ. चंद्रेश जैन ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि ट्रांसजेंडर संशोधन कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। याचिका में कहा गया है कि इस संशोधन के बाद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को खुद से अपने जेंडर की पहचान बताने की बजाय सरकार के वेरिफिकेशन और प्रमाणन की जरुरत होगी। याचिका में कहा गया है कि जेंडर की पहचान किसी व्यक्ति की गरिमा, स्वायत्तता और निजता का एक अहम पहलू है और इसे किसी चिकित्सकीय या प्रशासनिक स्क्रूटनी का मोहताज बनाकर नहीं रखा जा सकता है।
याचिका में उच्चतम न्यायालय के लीगल सर्विसेज अथॉरिटी बनाम केंद्र सरकार के फैसले का जिक्र किया गया है, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने स्वप्रमाणित जेंडर की पहचान को संविधान की धारा 14, 19(1)(ए) और 21 के तहत मौलिक अधिकार माना है। याचिका में कहा गया है कि इस संशोधन के जरिये मौलिक कानून से पीछे हटने का काम किया गया है। ये संशोधन बराबरी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अलावा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन है। ट्रांसजेंडर की पहचान की प्रमाणन प्रक्रिया से उन्हें मिलने वाले कल्याणकारी लाभों और कानूनी सुरक्षा से वंचित होना पड़ेगा।