ग्राम प्रधान जान्हवी के खिलाफ आपराधिक केस कार्यवाही रद्द

-चुने ग्राम प्रधान पर वोटरलिस्ट में छेड़छाड़ कर 42 नाम जोड़ने का आरोप-कोर्ट ने कहा, वोटरलिस्ट बनाना चुनाव अधिकारी का काम

ग्राम प्रधान जान्हवी के खिलाफ आपराधिक केस कार्यवाही रद्द

प्रयागराज, 08 नवंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मोहाना थाना क्षेत्र की ग्राम प्रधान जान्हवी के खिलाफ सी जे एम सिद्धार्थ नगर की अदालत में चल रही आपराधिक केस कार्रवाई रद्द कर दी है। याची पर वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ कर 42 नाम जोड़ने व धोखाधड़ी का आरोप था।

कोर्ट ने कहा ग्राम पंचायत चुनाव की मतदाता सूची सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी की गई थी। वोटरलिस्ट तैयार करने में याची चुनी गई ग्राम प्रधान की कोई भूमिका नहीं थी। हारे हुए प्रत्याशी लोकेश्वर त्रिपाठी के बयान पर याची को भी लपेटा गया है। वोटरलिस्ट बनाना चुनाव अधिकारी का काम है, याची का नहीं। याची के खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई सबूत नहीं है। शिकायतकर्ता ने इन्हीं आरोपों को लेकर चुनाव याचिका दायर की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्र ने जान्हवी ग्राम प्रधान झांगती की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याची का कहना था कि महराजगंज के मोहाना थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468 व धारा 1136(2) जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई। जिसमें ग्राम विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी व अपर खंड विकास अधिकारी को आरोपित किया गया। पुलिस ने विवेचना कर चार्जशीट दाखिल की। जिसमें लिपिक चुनाव अधिकारी बालकृष्ण व याची जान्हवी मणि त्रिपाठी को भी आरोपित बनाया गया। सीजेएम सिद्धार्थ नगर की अदालत में आपराधिक केस विचाराधीन था। जिसकी वैधता को चुनौती दी गई थी।

वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ कर 42 नाम जोड़ने और चुनाव जीतने का आरोप लगाया गया। हारे प्रत्याशी ने चुनाव याचिका भी दायर की है और उसी के बयान पर याची को आपराधिक केस में आरोपित किया गया था। जिसे कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग मानते हुए चुनौती दी गई। कहा याची के खिलाफ अपराध में शामिल होने का कोई सबूत नहीं है। एफआईआर में वह नामित नहीं रही है। राजनैतिक कारणों से हारे प्रत्याशी के बयान पर उसे फंसाया गया है। उसके खिलाफ कोई केस नहीं बनता। जिस पर कोर्ट ने आपराधिक केस कार्यवाही रद्द कर दी।