हिरण की हत्या मामले में ग्रामीणओं के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
हिरण की हत्या मामले में ग्रामीणओं के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
जालौन, 16 जुलाई । जालौन जिले में वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर चल रहे प्रयासों के बीच एक चिंताजनक घटना सामने आई है। सिरसाकलार थाना क्षेत्र में एक चीतल हिरण का मृत शरीर मिलने के मामले में पुलिस ने वन विभाग की तहरीर पर सख्त कार्रवाई की है। अवैध शिकार की नीयत से हिरण की बेरहमी से हत्या करने वाले कुछ ग्रामीणों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने सघन तलाश अभियान शुरू कर दिया है।
घटना का खुलासा मंगलवार को तब हुआ जब सिरसाकलार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोढ़ा किर्राही के घने जंगलों में मवेशी चराने गए चरवाहों की नजर एक मृत चीतल हिरण पर पड़ी। हिरण का शव क्षत-विक्षत अवस्था में था, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा था कि उसकी स्वाभाविक मृत्यु नहीं हुई है, बल्कि उसे मारा गया है। इस वीभत्स दृश्य को देखकर चरवाहों ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को दी।
सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने सर्वप्रथम घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और मृत हिरण के शव को अपने कब्जे में लिया। वन्यजीव संरक्षण के नियमों के तहत, मृत हिरण के शव को तत्काल पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया ताकि उसकी मृत्यु का सही कारण और समय का पता लगाया जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जांच के क्रम में, वन विभाग के कर्मचारी और मानपुर बीट प्रभारी वनरक्षक शिवम शर्मा ने सिरसाकलार थाने में औपचारिक रूप से अभियोग पंजीकृत कराया। उन्होंने अपनी तहरीर में बताया कि प्रारंभिक पूछताछ और स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर, यह आशंका व्यक्त की गई है कि कप्तान सिंह पुत्र हरपाल सहित कुछ अन्य ग्रामीणों ने मिलकर इस हिरण की हत्या की है। ऐसा माना जा रहा है कि इन लोगों ने शिकार के इरादे से इस निरीह प्राणी को निशाना बनाया था।
सिरसाकलार थाना पुलिस ने इस गंभीर मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) संख्या 85 दर्ज करते हुए तत्काल कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है। आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की महत्वपूर्ण धाराओं 9, 11, 50 और 51 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। ये धाराएं वन्यजीवों के शिकार, उससे जुड़े अपराधों और ऐसे कृत्यों में शामिल व्यक्तियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करती हैं। पुलिस अब नामजद आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
यह घटना वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके प्रति क्रूरता को रोकने की दिशा में प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वन विभाग और पुलिस दोनों ही इस मामले में पूरी गंभीरता से तहकीकात कर रहे हैं ताकि दोषियों को कानून के शिकंजे में लाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल अधिकारियों को दें।