औरैया : कार्तिक मेले का टेंडर रद्द करने की मांग तेज, सभासदों ने विधायक को सौंपा ज्ञापन

औरैया : कार्तिक मेले का टेंडर रद्द करने की मांग तेज, सभासदों ने विधायक को सौंपा ज्ञापन

औरैया : कार्तिक मेले का टेंडर रद्द करने की मांग तेज, सभासदों ने विधायक को सौंपा ज्ञापन

बिना बोर्ड प्रस्ताव नगर पंचायत का एकतरफा निर्णय, आम जनता व व्यापारियों से विश्वासघात: सभासद

औरैया, 28 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद के नगर पंचायत बाबरपुर-अजीतमल में लगने वाले ऐतिहासिक कार्तिक मेले के ठेके को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश सभासद एसोसिएशन के नेतृत्व में सभासदों ने मंगलवार काे सदर विधायक गुड़िया कठेरिया को ज्ञापन सौंपकर मेले के टेंडर को तत्काल निरस्त करने की जोरदार मांग उठाई।

सभासदों ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत प्रशासन ने बिना बोर्ड प्रस्ताव और बिना किसी सार्वजनिक विज्ञप्ति के मेले को मनमाने तरीके से ठेके पर दे दिया है। इस निर्णय से न केवल जनप्रतिनिधियों का अपमान हुआ है बल्कि आम जनमानस सहित स्थानीय व्यापारियों के हितों की भी अनदेखी की गई है।

उप्र सभासद एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राहुल तिवारी ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा पर होने वाला यह मेला धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। हर वर्ष पारदर्शिता के साथ नगर पंचायत की देखरेख में इसका आयोजन किया जाता रहा है, किंतु इस बार गोपनीय तरीके से टेंडर उठा दिया गया। उन्हाेंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुने गए प्रतिनिधियों को दरकिनार करना कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सभासदों ने विधायक को ज्ञापन के माध्यम से यह मांग रखी कि जनहित और परंपरागत व्यवस्था को देखते हुए बिना बोर्ड की अनुमति जारी किए गए इस टेंडर को तत्काल रद्द कर निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जाए। साथ ही भविष्य में ऐसे किसी भी निर्णय से पहले सभी सभासदों को विश्वास में लिए जाने की गारण्टी सुनिश्चित की जाए। सभासदों ने एक सुर में कहा यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई न हुई तो आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जाएगा।

उधर स्थानीय व्यापारियों ने भी नगर पंचायत के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि मेले में उनकी आर्थिक भागीदारी और आजीविका दांव पर रहती है, ऐसे में ठेका प्रथा गरीब दुकानदारों के हक पर सीधा प्रहार है।

प्रकरण को लेकर नगर में चर्चाओं का दौर गर्म है, जबकि मेले की तैयारियां अब आधी-अधूरी स्थिति में अटकी हुई नजर आ रही हैं। जनता को उम्मीद है कि जनप्रतिनिधियों की आवाज पर त्वरित निर्णय लेकर परंपरा की गरिमा बरकरार रखी जाएगी।