ऊपरी अदालत से राहत मिलने के बाद विधायक अब्बास अंसारी किया मऊ का दौरा

ऊपरी अदालत से राहत मिलने के बाद विधायक अब्बास अंसारी किया मऊ का दौरा

मऊ, 18 मई। गैंगस्टर एक्ट मामले में ऊपरी अदालत से राहत मिलने के बाद विधायक Abbas Ansari का मऊ दौरा अब सिर्फ कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरणों की दस्तक माना जा रहा है। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्य विकास अधिकारी को अदालत के आदेश की प्रतियां सौंपने पहुंचे अब्बास ने भले ही मीडिया से दूरी बनाई हो, लेकिन उनके बदले हुए तेवर और सीमित लेकिन सधे हुए संदेश ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। खासतौर पर उनका यह कहना कि “चुनावी सिंबल मायने नहीं रखता”, आने वाले समय की राजनीति की ओर बड़ा संकेत माना जा रहा है।

समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंचे अब्बास अंसारी ,बना चर्चा का विषय

प्रशासनिक मुलाकात के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी कार्यालय में नेताओं और जिलाध्यक्ष के साथ हुई लंबी बैठक ने चर्चाओं को और तेज कर दिया। राजनीतिक जानकार इसे अब्बास अंसारी की सक्रिय वापसी और संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि अदालत से राहत मिलने के बाद अब वह सिर्फ अपने विधानसभा क्षेत्र तक सीमित रहने के बजाय पूर्वांचल में एक बड़े मुस्लिम चेहरे के तौर पर खुद को स्थापित करने की तैयारी में हैं।

अब्बास अंसारी ने अलग-अलग चुनाव चिन्हों पर जीत का जिक्र करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी राजनीतिक पहचान किसी एक पार्टी या सिंबल की मोहताज नहीं है। यादव परिवार के नेताओं — Prateek Yadav, Anshul Yadav, Akshay Yadav और Aditya Yadav — के साथ पुराने रिश्तों का जिक्र भी समाजवादी खेमे के साथ उनकी नजदीकियों का सार्वजनिक संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बयान भविष्य की संभावित गठबंधन राजनीति और नई रणनीतिक भूमिका की तरफ इशारा कर सकता है। हालांकि 2022 विधानसभा चुनाव में अब्बास अंसारी समाजवादी पार्टी समर्थित सुभासप से उम्मीदवार थे और विधायक भी बने।

विधायक निधि व विकास कार्यों की अनदेखी पर उठाए सवाल

वहीं विधायक निधि में भेदभाव और विकास कार्यों में अनदेखी का मुद्दा उठाकर अब्बास अंसारी ने साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में वह “विकास बनाम भेदभाव” की राजनीति को धार देने वाले हैं। 95 प्रस्तावित लाइटों में सिर्फ 17 को मंजूरी मिलने का मुद्दा उठाकर उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, साथ ही अपने समर्थकों को भी राजनीतिक संदेश दिया। कुल मिलाकर मऊ में उनकी मौजूदगी ने यह संकेत दे दिया है कि अदालत से राहत के बाद अब अब्बास अंसारी पहले से ज्यादा सक्रिय, आक्रामक और राजनीतिक रूप से मुखर भूमिका में दिखाई दे सकते हैं।