प्रयागराज में आध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत संगम: मां गंगा ने कराया विश्व प्रसिद्ध बड़े हनुमान जी महाराज को स्नान
प्रयागराज में आध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत संगम: मां गंगा ने कराया विश्व प्रसिद्ध बड़े हनुमान जी महाराज को स्नान
प्रयागराज, 15 जुलाई । आध्यात्मिकता और प्रकृति के अनूठे संगम स्थली, विश्व प्रसिद्ध प्रयागराज में एक विहंगम और पवित्र दृश्य देखने को मिला। मोक्षदायिनी पतित पावनी मां गंगा ने स्वयं अपने प्रचंड वेग और वात्सल्य से विश्व प्रसिद्ध संगम तट पर स्थित लेटे हुए बड़े हनुमान जी महाराज को स्नान कराया। यह एक ऐसा अलौकिक क्षण था जिसने हजारों श्रद्धालुओं को भक्तिभाव से ओत-प्रोत कर दिया।
सदियों से चली आ रही इस दिव्य परंपरा के अनुसार, जैसे ही गंगा का जल स्तर बढ़ा, मां गंगा स्वयं अपने लाड़ले हनुमान जी के दर्शन और स्नान के लिए उनके पावन स्थान पर जा पहुंचीं। मंदिर के गर्भगृह में गंगा के जल के प्रवेश करते ही पूरा वातावरण 'हर-हर गंगे' और 'जय श्री राम' के जयघोष से गूंज उठा। इस अद्भुत नजारे को अपनी आंखों से देखने के लिए दूर-दूर से आए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। घंटा-घड़ियाल और शंखनाद की मधुर ध्वनि के बीच, पूजनीय महंत बलवीर गिरि की अगुवाई में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बड़े हनुमान जी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। यह क्षण मानो धरती पर देवलोक का अवतरण था, जहाँ प्रकृति और देवत्व का साक्षात् मिलन हो रहा था।
वार्षिक परंपरा का निर्वहन: इस वर्ष 22 दिन पहले हुआ स्नान
ऐसी चिर-परिचित मान्यता है कि प्रत्येक वर्ष मां गंगा संकट मोचन हनुमान जी को स्नान कराती हैं, जिससे वे अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करें और क्षेत्र में सुख-शांति बनी रहे। प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी मां गंगा अपने निर्धारित समय से पूर्व, पिछले वर्ष की तुलना में पूरे 22 दिन पहले, मंगलवार दोपहर बाद हनुमान मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर गईं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में यह दिव्य स्नान 7 अगस्त को हुआ था, जबकि इस वर्ष यह 15 जुलाई को ही संपन्न हो गया। गंगा के जल से गर्भगृह भर जाने के बाद, हनुमान जी की प्रतिरूप छोटी मूर्ति को विशेष अनुष्ठान के साथ बाहर लाया गया, ताकि भक्तगण उनके दर्शन कर सकें। इसके उपरांत, बड़े हनुमान जी महाराज पूर्ण रूप से जल के अन्दर शयन करने चले गए, और मंदिर के कपाट अगले कुछ दिनों के लिए बंद कर दिए गए। यह अद्वितीय 'शयन मुद्रा' ही इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता और पहचान है, जहाँ हनुमान जी धरती में लेटी हुई मुद्रा में स्थापित हैं।
बाढ़ की आहट और जल स्तर की स्थिति
बड़े हनुमान जी के इस दिव्य स्नान के बाद प्रयागराज जनपद में बाढ़ की आहट भी तेज हो गई है, जो अक्सर गंगा के इस तरह मंदिर के भीतर प्रवेश करने के साथ जुड़ी होती है। हालांकि, जिला प्रशासन ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। मंगलवार शाम चार बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, संगम तट पर स्थित किला के पास गंगा का जल स्तर अभी भी खतरे के निशान 84.734 मीटर से नीचे है।
नदियों के मौजूदा जल स्तर पर गौर करें तो, यमुना नदी का जल स्तर पुराना नैनी पुल में 81.51 मीटर (-0.04 मीटर) पर पहुंच गया है। वहीं, अल्लापुर के बक्सी स्टॉप में गंगा नदी का जलस्तर 81.55 मीटर (+0.04 मीटर) दर्ज किया गया, जो फाफामऊ में 81.74 मीटर (+0.08 मीटर) तक पहुंच गया है। इसी तरह, वाराणसी की तरफ छतनाग में गंगा का जल स्तर 81.09 मीटर (+0.12 मीटर) पर पहुंचा है। प्रशासन द्वारा लगातार जल स्तर की निगरानी की जा रही है और संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। यह घटना पवित्रता, प्रकृति की शक्ति और जनमानस की अटूट आस्था का एक जीवंत प्रमाण है।