ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में कांस्टेबल की मौत पर पत्नी को छह फीसदी ब्याज सहित दस लाख मुआवजा देने का निर्देश
ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में कांस्टेबल की मौत पर पत्नी को छह फीसदी ब्याज सहित दस लाख मुआवजा देने का निर्देश
प्रयागराज, 11 मई इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ड्यूटी के दौरान पुलिस कांस्टेबल की दुर्घटना में मौत पर राज्य सरकार काे उनकी पत्नी याची को छह फीसदी ब्याज सहित दस लाख रुपये का मुआवजा का भुगतान आठ हफ्ते में करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि 28 जुलाई 10 का शासनादेश एक जनवरी 2006 से लागू किया गया था और याची के पति की मौत आठ मई 2006 को दुर्घटना के कारण हुई थी। इसलिए ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मौत के लिए पत्नी याची मुआवजा पाने की हकदार है। कोर्ट ने याची को मुआवजा देने से इंकार करने के आदेश 26 दिसम्बर 11 को रद्द कर दिया है और कहा है कि मौत से मुआवजे का भुगतान होने तक छह फीसदी ब्याज का भुगतान किया जाय।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने श्रीमती कमलेश की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याची का कहना था कि उसके पति सिविल पुलिस में कांस्टेबल थे। वह फ़िरोज़ाबाद के बसई मोहम्मदपुर थाने में तैनात थे। मुख्यालय से डाक लेकर वापस आ रहे थे कि दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में मौत हो गई। राज्य सरकार ने 19 अगस्त 88 के शासनादेश के हवाले से मुआवजा देने से इंकार कर दिया। जिसे चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने राज्य सरकार के तर्क को नहीं माना और कहा 2010 का शासनादेश 2006 में लागू हो चुका था। इसलिए याची मुआवजा पाने की हकदार हैं। 2010 के शासनादेश से 1988 के शासनादेश की शर्तों में बदलाव किया गया है। कोर्ट ने कहा कि अब 1988 का शासनादेश लागू नहीं होगा।
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