जलभराव मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, DM-नगर आयुक्त को अंतिम चेतावनी; हलफनामा नहीं तो कोर्ट में हों पेश

वाराणसी में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या पर दाखिल जनहित याचिका में अधिकारियों ने नहीं दिया जवाब, हाईकोर्ट ने 3 सितंबर को दोपहर 2 बजे सुनवाई तय की

जलभराव मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, DM-नगर आयुक्त को अंतिम चेतावनी; हलफनामा नहीं तो कोर्ट में हों पेश

प्रयागराज, 02 सितंबर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने वाराणसी में जलभराव की समस्या को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है।

जनहित याचिका कमलाकांत त्रिपाठी व अन्य ने दायर की है। 17 अगस्त 2026 को कोर्ट ने वाराणसी में बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश राज्य, वाराणसी के जिलाधिकारी और नगर आयुक्त, नगर निगम को दो सप्ताह के भीतर प्रति-शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया था।

कोर्ट को सूचित किया गया कि 31 अगस्त 2026 की कार्यालय रिपोर्ट के अनुसार दोनों अधिकारियों को नोटिस तामील हो चुका है। बावजूद इसके किसी भी अधिकारी ने न तो प्रति-शपथपत्र दाखिल किया और न ही कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इस पर नाराज़गी जताते हुए खंडपीठ ने आदेश दिया कि दोनों अधिकारी बिना किसी विफलता के अपने शपथपत्र दाखिल करें। जो भी अधिकारी ऐसा करने में असफल रहेगा, उसे स्वयं व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा। हालांकि जो अधिकारी आदेश का पालन कर देगा, उसे व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट रहेगी।

मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर 2026 को दोपहर दाे बजे निर्धारित की गई है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि इस आदेश की जानकारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी के माध्यम से जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को उसी दिन दी जाए और अनुपालन रिपोर्ट अगले दिन तक प्रस्तुत की जाए।