रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा और सेहत पर BHU में मंथन, साइबर ठगी से बचाव के भी दिए टिप्स

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के सेवानिवृत्ति-पूर्व प्रशिक्षण में पेंशन, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य, पारिवारिक अपेक्षाओं और डिजिटल सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।

रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा और सेहत पर BHU में मंथन, साइबर ठगी से बचाव के भी दिए टिप्स

वाराणसी, 23 सितंबर । उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्रबंध अध्ययन संस्थान (आईएम) में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आयोजित पांच दिवसीय सेवानिवृत्ति-पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रम में सेवानिवृत्ति के व्यावहारिक और वित्तीय पहलुओं पर विमर्श हुआ। तीसरे दिन बुधवार को सेवानिवृत्ति के बाद की वित्तीय सुरक्षा, पेंशन प्रबंधन, स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिकताओं और साइबर धोखाधड़ी से बचाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम की शुरुआत “स्मूद एग्जिट, स्मार्टर बेनिफिट्स : सुपरएन्युएशन, पेंशन, पीएफ, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट एवं टर्मिनल बेनिफिट्स” विषयक सत्र से हुई। भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व महाप्रबंधक डॉ. शेखर श्रीवास्तव ने बैंकिंग क्षेत्र के अपने अनुभव साझा करते हुए सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले विभिन्न लाभों, आवश्यक दस्तावेजों और दावा प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी।

“डिजिटल पेंशन प्रोसेसिंग एवं शिकायत निवारण” विषय पर बीएचयू के संयुक्त कुलसचिव (लेखा) संजय कुमार ने पेंशन व्यवस्था की व्यापक संरचना की जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल और पारंपरिक पेंशन प्रणालियों की तुलना करते हुए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की प्रक्रिया समझाई। —स्वास्थ्य को लेकर संतुलित दृष्टिकोण की सलाह

“चिकित्सीय आकस्मिकताओं की योजना” विषयक सत्र में आईएम, बीएचयू की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिंदिता चक्रवर्ती ने सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने वृद्धावस्था के अलग-अलग आयु-वर्गों की चर्चा करते हुए 65 से 74 वर्ष की आयु के वर्ग को “यंग ओल्ड” के रूप में रेखांकित किया। डॉ. चक्रवर्ती ने उम्र के अनुरूप खान-पान और जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि स्वास्थ्य को लेकर यथार्थवादी अपेक्षाएं रखना जरूरी है, ताकि परिवार पर अनावश्यक मानसिक बोझ न पड़े।

उन्होंने अवसाद, अकेलेपन और डिमेंशिया से जुड़े आम सवालों पर भी चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवाओं को स्वयं बंद करने के बजाय डॉक्टर या किसी विश्वसनीय शुभचिंतक की सलाह से ऐसे निर्णय लेने चाहिए। नियमित शारीरिक सक्रियता पर जोर देते हुए उन्होंने प्रतिदिन कम से कम 15 से 20 मिनट व्यायाम करने की सलाह दी।

—‘केयरगिवर बर्डन’ पर भी हुई चर्चा

सत्र के दौरान ‘केयरगिवर बर्डन’ यानी देखभाल करने वाले परिवार के सदस्यों पर पड़ने वाले मानसिक और व्यावहारिक दबाव पर भी चर्चा हुई। डॉ. चक्रवर्ती ने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारियों की एक बड़ी संख्या ऐसी है, जिनकी संतानें कोलकाता, मुंबई, गुरुग्राम, आगरा, चंडीगढ़, लखनऊ, कानपुर, नोएडा और भुवनेश्वर जैसे शहरों में रह रही हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण हो जाता है। विराट सिंह ने प्रतिभागियों को साइबर ठगी के विभिन्न तरीकों, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और सावधानियों के बारे में जानकारी दी।