58 करोड़ की सीएसआर परियोजना से वाराणसी के ऐतिहासिक तालाब, कुंड और कुओं का होगा कायाकल्प
— ऐतिहासिक तालाबों, कुंडों और कुओं के कायाकल्प के लिए एमओयू
वाराणसी, 17 जुलाई। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के ऐतिहासिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएफसी) ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत 58 करोड़ रुपये की लागत से शहर के ऐतिहासिक तालाबों, कुंडों और सामुदायिक कुओं के जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए वाराणसी स्मार्ट सिटी के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
सिगरा स्थित रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में शहर के पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहरों के संवर्धन के प्रति साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
इस अवसर पर महापौर अशोक तिवारी ने कहा कि काशी की आत्मा उसके प्राचीन कुंडों, तालाबों और कुओं में बसती है। इन सदियों पुराने जल स्रोतों का संरक्षण न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए आवश्यक है, बल्कि यह शहर की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखने का माध्यम है। उन्होंने इस पहल के लिए पीएफसी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना काशीवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी एक अमूल्य उपहार साबित होगी।
पीएफसी की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक परमिंदर चोपड़ा ने कहा कि पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन देश के बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के प्रति भी समान रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि काशी जैसी विश्वविख्यात आध्यात्मिक नगरी में 58 करोड़ रुपये की इस सीएसआर परियोजना के माध्यम से ऐतिहासिक जल निकायों का पुनरुद्धार करना संस्थान के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परियोजना का क्रियान्वयन आधुनिक मानकों के अनुरूप निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाएगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार के साथ स्थानीय पर्यावरण को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
नगर आयुक्त एवं वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिमांशु नागपाल ने परियोजना की कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसका क्रियान्वयन वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तालाबों और कुंडों के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ उनके पानी को प्राकृतिक रूप से साफ रखने के लिए ईको-फ्रेंडली तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। सामुदायिक कुओं के जीर्णोद्धार से स्थानीय निवासियों को स्वच्छ जल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी ।
समझौते के तहत वाराणसी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक जल निकायों का व्यापक कायाकल्प किया जाएगा। परियोजना में सारनाथ क्षेत्र के तालाबों का पर्यावरणीय पुनर्विकास, कंदवा, संदाहा, रेवागीर, सारंगनाथ, पुलिस लाइन और पांडेयपुर सहित 25 तालाबों की डिसिल्टिंग एवं डिस्लजिंग, रानी पोखरी, कोनिया बैतरणी कुंड, कुरुक्षेत्र तालाब, सोना तालाब, बाबा जगन्नाथ दास सरोवर और पोंगलपुर समेत 30 कुंडों का जीर्णोद्धार तथा 100 सामुदायिक कुओं के पुनर्विकास एवं जल शोधन का कार्य शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से न केवल वाराणसी की ऐतिहासिक जल संरचनाओं का संरक्षण होगा, बल्कि भूजल पुनर्भरण, जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।----------