मुक्त विश्वविद्यालय में स्लोगन लेखन प्रतियोगिता, युवाओं ने रचनात्मक नारों से दिया नशा मुक्त समाज का संदेश

नशा मुक्त भारत अभियान पखवाड़ा के तहत आयोजित प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण का किया आह्वान

मुक्त विश्वविद्यालय में स्लोगन लेखन प्रतियोगिता, युवाओं ने रचनात्मक नारों से दिया नशा मुक्त समाज का संदेश

प्रयागराज, 06 अगस्त। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में नशा मुक्त भारत अभियान पखवाड़ा के अंतर्गत गुरुवार को नशा मुक्त भारत' विषय पर स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। मानविकी विद्याशाखा के समन्वयक प्रो. सत्यपाल तिवारी के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने रचनात्मक नारों के माध्यम से नशा मुक्त समाज का प्रभावी संदेश दिया।

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने नशा उन्मूलन, स्वस्थ जीवन, युवा शक्ति, पारिवारिक उत्तरदायित्व, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर आकर्षक एवं प्रेरणादायक स्लोगन प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों के नारों में युवाओं को नशे से दूर रहकर सकारात्मक जीवन शैली अपनाने तथा स्वस्थ एवं सशक्त भारत के निर्माण का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।

निर्णायक मंडल ने स्लोगनों का मूल्यांकन मौलिकता, संक्षिप्तता, प्रभावशीलता, भाषा की शुद्धता, सृजनात्मकता और सामाजिक संदेश के आधार पर किया। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की रचनात्मक सोच और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से नशामुक्त, स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अतुल कुमार मिश्र ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी प्रतिनिधि एवं टीम लीडर प्रीति ने प्रस्तुत किया।

जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि विश्वविद्यालय में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उनका उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना, उनमें सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना तथा रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से नशामुक्त भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी ऐसे जनजागरूकता कार्यक्रमों का आ

योजन करता रहेगा।