‘अपनी माटी, अपना गांव’ मातृ भूमि योजना से गांवों के विकास में जन भागीदारी को नई उड़ान

गांव के विकास में देश-विदेश में रहने वाले लोग भी बन सकेंगे भागीदार; परियोजना लागत का 60% दानकर्ता और 40% राज्य सरकार करेगी वहन

‘अपनी माटी, अपना गांव’ मातृ भूमि योजना से गांवों के विकास में जन भागीदारी को नई उड़ान

लखनऊ, 19 सितंबर । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना’ संचालित की जा रही है। योजना के माध्यम से देश-विदेश में निवास कर रहे ऐसे व्यक्तियों एवं संस्थाओं को अपनी मातृभूमि एवं गांव के विकास से जुड़ने का अवसर प्रदान किया जा रहा है, जो अपने गांव में जनोपयोगी एवं विकासपरक कार्य कराने के इच्छुक हैं।

पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना’ अपनी माटी, अपने गांव और अपनी जड़ों से जुड़े लोगों को ग्रामीण विकास की प्रक्रिया से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश में रहने वाले ऐसे व्यक्ति एवं संस्थाएं, जिनका अपने गांव से भावनात्मक एवं सामाजिक जुड़ाव है, योजना के माध्यम से अपने गांव के विकास में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सकते हैं। जनसहभागिता से गांवों में आवश्यक जनोपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण होने के साथ ही ग्रामीणों में अपने गांव के प्रति अपनत्व, जिम्मेदारी और सामुदायिक स्वामित्व की भावना भी मजबूत होगी। उन्होंने सभी इच्छुक व्यक्तियों एवं संस्थाओं से अपनी मातृभूमि के विकास में सहभागी बनने का आह्वान किया।

योजनान्तर्गत कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था प्रदेश के किसी भी जनपद के किसी गांव में विकास कार्य कराने के लिए सहभागी बन सकती है। इच्छुक दानकर्ता द्वारा परियोजना की कुल लागत का 60 प्रतिशत अंशदान किया जाता है, जबकि शेष 40 प्रतिशत लागत राज्य सरकार द्वारा वहन की जाती है। इस व्यवस्था के माध्यम से सरकार और समाज की सहभागिता से गांवों में विभिन्न प्रकार के जनोपयोगी विकास कार्यों को गति प्रदान की जा रही है। योजना का उद्देश्य केवल विकास कार्य कराना ही नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और गांव से भावनात्मक रूप से जुड़े लोगों को ग्रामीण विकास की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाना भी है।

पंचायती राज निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा कि योजना का उद्देश्य गांव से जुड़े व्यक्तियों एवं संस्थाओं को स्थानीय विकास में सक्रिय भागीदारी का अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि मातृभूमि योजना जनसहभागिता को ग्रामीण विकास से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है, जिसके अंतर्गत दानदाताओं की इच्छानुसार जनोपयोगी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे गांवों में आवश्यक सुविधाओं के विकास को गति मिलने के साथ ही समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिकाधिक लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

मातृभूमि योजना में दानकर्ता की सहभागिता को विशेष सम्मान भी प्रदान किया जाता है। शासनादेश के अन्तर्गत दानकर्ता के प्रस्ताव के अनुरूप निर्मित परियोजना पर शिलापट्ट लगाए जाने की व्यवस्था की गई है। इससे दानकर्ता की विकास कार्य में सहभागिता को स्थायी रूप से सम्मानित करने के साथ-साथ अन्य लोगों को भी अपने गांव के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरणा मिलेगी।

योजना में सहभागिता को सरल एवं सुगम बनाने के लिए विभाग द्वारा ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है। इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं मातृभूमि योजना के पोर्टल उइीनउप.नचचतक.पद के माध्यम से आवेदन एवं योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए विभाग द्वारा हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में जानकारीपरक ब्रोशर भी तैयार कराया गया है, जिससे देश-विदेश में निवास कर रहे लोगों तक योजना की जानकारी पहुंचाई जा सके।

‘उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना’ अपनी मातृभूमि से जुड़े लोगों को गांव के विकास में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना सरकार के संसाधनों के साथ समाज की सहभागिता को जोड़ते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाओं को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। देश-विदेश में रह रहे प्रवासी नागरिकों, व्यक्तियों, संस्थाओं एवं अन्य इच्छुक लोगों से अपील है कि वे अपनी मातृभूमि से जुड़कर गांव के विकास में सहभागी बनें और इस जनभागीदारी आधारित पहल को सफल बनाने में अपना योगदान प्रदान करें।