मुख्यमंत्री की घोषणा को मिली रफ्तार, बी-पैक्स की ताकत हुई दोगुनी

मुख्यमंत्री की घोषणा को मिली रफ्तार, बी-पैक्स की ताकत हुई दोगुनी

मुख्यमंत्री की घोषणा को मिली रफ्तार, बी-पैक्स की ताकत हुई दोगुनी

लखनऊ, 14 अगस्त । किसानों एवं सहकारिता क्षेत्र के हित में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। बी-पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों) की ब्याजमुक्त कैश क्रेडिट ऋण सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 15.00 लाख रुपये किए जाने की दिशा में सहकारिता विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है।

यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 21 मार्च, 2025 को उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ की 61वीं वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में की गई घोषणा के अनुपालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में सहकारिता विभाग द्वारा बी-पैक्स की ब्याजमुक्त कैश क्रेडिट ऋण सीमा बढ़ाए जाने के संबंध में शासनादेश जारी कर आवश्यक प्रक्रिया एवं पात्रता निर्धारित कर दी गई है।

इस महत्वपूर्ण निर्णय के संबंध में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), सहकारिता, उत्तर प्रदेश जे.पी.एस. राठौर ने मुख्यमंत्री के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया तथा कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश का सहकारिता क्षेत्र निरंतर नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है तथा किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा निरंतर महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।

श्री राठौर ने कहा कि बी-पैक्स की ब्याजमुक्त कैश क्रेडिट ऋण सीमा को 15 लाख रुपये तक करने से बी-पैक्स की कार्यशील पूंजी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे बी-पैक्स को उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होने से समय पर किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश की बी-पैक्सों द्वारा 7 हजार करोड़ रुपये का व्यवसाय करके 176 करोड़ रुपये का मुनाफा प्राप्त किया गया है। उत्तर प्रदेश की इस अनूठी पहल का केन्द्र सरकार द्वारा भी सराहना की गई। इसका अनुकरण कर अन्य प्रदेश भी अपने यहां के किसानों लाभान्वित कर सकते हैं।

सहकारिता विभाग की इस पहल से बी-पैक्स को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम एवं सुदृढ़ बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही किसानों को ग्रामीण स्तर पर विभिन्न प्रकार की सहकारी एवं जनोपयोगी सुविधाएं उपलब्ध कराने की क्षमता में वृद्धि होगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ सहकारिता के माध्यम से किसानों की आय एवं आर्थिक सशक्तीकरण को भी गति मिलेगी।