प्रयागराज में जलभराव पर हाईकोर्ट सख्त, 50 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनेगा ड्रेनेज मास्टर प्लान

वित्त विभाग को तीन सप्ताह में वित्तीय मंजूरी देने का निर्देश, एमएनएनआईटी के चार प्रोफेसर देंगे तकनीकी सहयोग; अगली सुनवाई 16 नवंबर को

प्रयागराज में जलभराव पर हाईकोर्ट सख्त, 50 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनेगा ड्रेनेज मास्टर प्लान

प्रयागराज, 21 अक्टूबर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज शहर में जलभराव की समस्या पर कहा कि जो भी ड्रेनेज प्रोजेक्ट बन रहा है, वह ऐसा हो कि अगले 50 साल तक शहर में बारिश से बाढ़ के हालात न बनें। इसके लिए एम एल एन एन आई टी प्रयागराज के पर्यावरण और सिविल इंजीनियरिंग के 4 प्रोफेसर नगर निगम की फ्री में मदद करेंगे।

यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार तथा न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया। नगर आयुक्त प्रयागराज शीलम साई तेजा कोर्ट में हाजिर हुए और चल रहे व प्रस्तावित प्रोजेक्ट का मैप पेश किया। प्रयागराज में हल्की बारिश के बाद जल भराव के बाद 20.दिसंबर 2024 के शासनादेश के तहत ड्रेनेज मास्टर प्लान न बनने और शहर में जलभराव को लेकर हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लिया।

नगर आयुक्त शीलम साई तेजा ने बताया कि 6 अक्टूबर 2026 को शासनादेश से प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है, लेकिन वित्त विभाग से वित्तीय स्वीकृति अभी लंबित है। टेंडर प्रक्रिया में कम से कम 40 दिन लगेंगे। पेश किए गए मैप में लाल, पीले, हरे रंग से नालों को दिखाया गया है। मौजूदा नालों के अपग्रेडेशन, समानांतर नए नालों और मोरी गेट पर पंपिंग स्टेशन के अपग्रेडेशन का प्रस्ताव है, ताकि गंगा-यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने पर भी शहर जल भराव से बचा रहे। आशंका जताई गई कि क्या नालों की क्षमता इतनी है कि भारी बारिश का पूरा पानी ले जा सके? शहर की टोपोग्राफी और पानी के वॉल्यूम की स्टडी क्या हुई है? कोर्ट ने कहा इसके लिए एम एल एन एन आई टी के पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसरों की मदद ली जाए।

वकीलों ने बताया स्थानीय लोगों ने कई जगह नालों को ऊपर से आर सी सी स्लैब डालकर नाला ढक दिया है, इतने बड़े स्लैब हैं कि उठाए भी नहीं जा सकते, इससे नाले का फ्लो रुक गया है। नगर निगम के वकील ने कहा यह अतिक्रमण है, अवैध है, किसी को अनुमति नहीं दी गई।

कोर्ट ने 4 बिंदु तय किए

1. प्रोजेक्ट की 50 साल तक की प्रभावशीलता

2. तकनीकी मदद की जरूरत

3. लो-लाइंग एरिया में कैचमेंट एरिया के लिए जमीन

4. सीवर लाइनों की नियमित सफाई

कोर्ट ने वित्त विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि 6 अक्टूबर 2026 के शासनादेश से स्वीकृत प्रोजेक्ट को 3 हफ्ते में वित्तीय स्वीकृति दे और अनुपालन हलफनामा दाखिल करे, नहीं तो प्रमुख सचिव वित्त अगली तारीख पर कोर्ट में हाजिर रहें। कोर्ट ने कहा नगर निगम कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज यूपी जल निगम (अर्बन) को तुरंत टेंडर नोटिस जारी करने का निर्देश दे, ताकि वित्त स्वीकृति मिलते ही 40 दिन के भीतर टेंडर फाइनल हो जाए।

एम एन एन आई टी प्रयागराज को निर्देश दिया कि पर्यावरण एवं टेक्नोलॉजी विभाग से 2 प्रोफेसर और सिविल इंजीनियरिंग विभाग से 2 प्रोफेसर तुरंत नगर निगम को दें। वे प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले, शुरू होते समय और जमीन पर चलते समय फ्री सलाह देंगे, ताकि नालों की क्षमता 50 साल के हिसाब से बढ़ाई जा सके और जहां नाले जुड़ते हैं, वहां बड़ा गड्ढा खोदा जाए ताकि ओवरफ्लो न हो।

कोर्ट ने कहा जवाहर लाल नेहरू रोड और महात्मा गांधी मार्ग समेत कहीं भी नालों पर बने स्थायी पेवमेंट/गेट/दीवार/निर्माण तुरंत हटाए जाएं। सिर्फ गेट तक जाने के लिए एंट्री का पेवमेंट रखा जा सकता है। निवासियों को नालों के किनारे बाउंड्री वॉल बनानी होगी ताकि नगर निगम को नाले तक आसानी से पहुंच मिले। गंगा प्रदूषण बोर्ड (जल निगम ग्रामीण के माध्यम से) हर 6 महीने में सीवर लाइनों की सफाई/सिल्ट हटाने का काम करेगा, और हर साल बरसात से पहले एक बार जरूर सफाई की जाय।

नगर आयुक्त शीलम साई तेजा ने कोर्ट को बताया कि जॉर्ज टाउन क्लब की जमीन और सी एम पी डिग्री कॉलेज के सामने के पी ट्रस्ट की निजी जमीन पर कैचमेंट एरिया बन सकता है, जिससे लिडल रोड और सी वाई चिंतामणि रोड का जलभराव रुकेगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह वहां पंपिंग स्टेशन और वाटर कैचमेंट टैंक के लिए जगह चिन्हित करे और के पी ट्रस्ट की जमीन को चिन्हित करे ताकि सोसाइटी लीज न दे तो 90 साल के लिए लीज पर अधिग्रहण किया जा सके। इस पर रिपोर्ट अगली तारीख पर दी जाए। सभी अनुपालन हलफनामे अगली सुनवाई की तिथि 16 नवंबर 2026 तक दाखिल होंगे। कोर्ट ने प्रमुख सचिव (वित्त) और गंगा प्रदूषण बोर्ड के माध्यम से यूपी जल निगम (ग्रामीण) को पक्षकार बनाय।