SRN अस्पताल में गंदगी, बाहर से दवा-जांच और मरीजों से पैसे मांगने की शिकायत; मंडलायुक्त ने 4 दिन में सुधार का अल्टीमेटम दिया

मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. के औचक निरीक्षण में ट्रॉमा सेंटर से ऑर्थो और ENT वार्ड तक कई खामियां मिलीं; अपर निदेशक स्वास्थ्य से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब, दोषियों पर कार्रवाई के संकेत।

SRN अस्पताल में गंदगी, बाहर से दवा-जांच और मरीजों से पैसे मांगने की शिकायत; मंडलायुक्त ने 4 दिन में सुधार का अल्टीमेटम दिया

प्रयागराज, 08 सितंबर। मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम.ने मंगलवार काे स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) का औचक निरीक्षण किया।इस दाैरान बाहर से दवाएं और जांच कराने की शिकायत के साथ अस्पताल में मिली अव्यवस्थाओं पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को चार दिन के भीतर सभी व्यवस्थाएं निर्धारित प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चार दिन बाद अस्पताल का दोबारा औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। वहीं, मरीजों काे दवाइयां और जांच बाहर से कराने की शिकायतों तथा अन्य कमियों को गंभीरता से लेते हुए अपर निदेशक स्वास्थ्य से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

मंडलायुक्त ने मंगलवार को अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. राकेश शर्मा, सीएमओ प्रयागराज डॉ. अरुण तिवारी, सीएमएस एसआरएन चिकित्सालय डॉ. नीलम और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ अस्पताल का निरीक्षण किया गया। सबसे पहले उन्होंने ट्रॉमा सेंटर के हेल्प डेस्क, ट्रॉमा ट्रायेज कक्ष और वार्ड संख्या-एक का निरीक्षण किया। ट्रॉमा सेंटर में सफाई व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिली। मंडलायुक्त के पहुंचने के समय ही सफाई कराई जा रही थी। मरीजों की देखभाल और उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को मरीजों के प्रति संवेदनशीलता बरतने और त्वरित चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

ट्रॉमा ट्रायेज कक्ष में दवाइयों, इंजेक्शनों और अन्य चिकित्सा सामग्री के रख-रखाव में एसओपी का पालन नहीं मिला। धूल और गंदगी के साथ जैव चिकित्सा कचरे का उचित पृथक्करण नहीं किया गया था। फोर्सेप्स और अन्य उपकरणों की सफाई भी ठीक नहीं थी। इनकी सफाई में इस्तेमाल होने वाला तरल पदार्थ भी पुराना पाया गया। कुछ बेडशीट पर गंदगी और खून के निशान मिले।

मंडलायुक्त ने रेजिडेंट और इंटर्न डॉक्टरों से व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि अस्पताल में बड़ी संख्या में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीज उपचार के लिए आते हैं। इसलिए उन्हें स्वच्छ, सुरक्षित और मानक के अनुरूप चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है।

ट्रॉमा सेंटर के पास स्थित माइनर ऑपरेशन थियेटर और ड्रेसिंग कक्ष की सफाई व्यवस्था भी खराब मिली। यहां एक महिला मरीज खुले घाव के उपचार के दौरान उचित देखभाल के बिना मिली। मंडलायुक्त ने संबंधित चिकित्सा कर्मचारियों को मरीजों की देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।

एक्स-रे कक्ष की ओर जाते समय मंडलायुक्त को ऑक्सीजन पर एक गंभीर वृद्ध मरीज बिना उचित देखभाल के मिला। पूछताछ में पता चला कि मरीज के साथ मौजूद व्यक्ति के पास एक्स-रे की पर्ची नहीं थी, जिसके कारण वह एक्स-रे के लिए इंतजार कर रहा था। मंडलायुक्त ने तत्काल एक्स-रे कराने और मरीज को उसके साथ आए व्यक्ति के साथ संबंधित वार्ड में पहुंचाने के निर्देश दिए।

एक्स-रे कक्ष में भी सफाई व्यवस्था बेहद खराब मिली। मशीन के आसपास धूल और गंदगी के अलावा टूटी कुर्सी, कार्टन में स्क्रैप सामग्री और कर्मचारियों के हेलमेट रखे मिले। मशीन के आसपास अनावश्यक सामान भी रखा था। एक जगह पुरानी पर्चियां भी पड़ी थीं। मंडलायुक्त ने संबंधित टेकनीशियन को फटकार लगाते हुए तत्काल सफाई कराने और अनावश्यक सामान हटाने के निर्देश दिए।

मेल ऑर्थो वार्ड संख्या-दाे में मंडलायुक्त ने भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत की। कई मरीजों ने बताया कि उन्हें दवाइयां बाहर से खरीदने के लिए पर्चे दिए जाते हैं। मरीजों ने बाहर से कराए गए एक्स-रे और अन्य जांचों की पर्चियां तथा रिपोर्ट भी दिखाईं।

इस पर मंडलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों और सीएमएस से जवाब मांगा। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि कॉरपोरेशन से कई आवश्यक दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। इस कारण कुछ मरीजों को बाहर से दवा लेने के लिए भेजना पड़ता है।

निरीक्षण के दौरान मरीजों को इंजेक्शन की खुराक पहले से दिए जाने की स्थिति भी सामने आई। पूछताछ में बताया गया कि 24 घंटे की खुराक पहले ही मरीज को उपलब्ध करा दी जाती है। मंडलायुक्त ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए दवाइयों और इंजेक्शनों के रख-रखाव तथा उपयोग में निर्धारित एसओपी का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।

ईएनटी ओपीडी में जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण, फोर्सेप्स और अन्य सामग्री पर्याप्त रूप से संक्रमणमुक्त नहीं मिली। बेडशीट गंदी थी। कॉटन और गॉज सहित अन्य सामग्री भी अस्वच्छ और अव्यवस्थित मिली।

मंडलायुक्त ने रेजिडेंट डॉक्टरों और संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिया कि मरीज अस्पताल में भरोसे के साथ आते हैं। इसलिए स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, उपकरणों की उचित स्टेरिलाइजेशन और गुणवत्तापूर्ण उपचार हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

महिला ऑर्थो वार्ड में मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत के दौरान कई लोगों ने दवाइयां और जांच बाहर से लिखे जाने की शिकायत की। कुछ मरीजों ने बाहर से खरीदी गई दवाइयों के पर्चे और बाहर कराई गई जांचों की रिपोर्ट भी दिखाई। कुछ मरीजों और परिजनों ने छोटी-छोटी सेवाओं के लिए कर्मचारियों द्वारा पैसे मांगने की शिकायत भी मंडलायुक्त से की।

मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने सीएमएस डॉ. नीलम को निर्देश दिए कि अस्पताल की सभी व्यवस्थाओं को चार दिन के भीतर निर्धारित प्रोटोकॉल और एसओपी के अनुसार दुरुस्त किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके बाद अस्पताल का दोबारा औचक निरीक्षण किया जाएगा।

निरीक्षण में मिली कमियों और मरीजों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. राकेश शर्मा से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

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