प्रयागराज: हाइड्रोलिक टैम्पिंग मशीन से रेलवे ट्रैक का अनुरक्षण होगा तेज और सुरक्षित
चार कर्मचारियों की मदद से होगा संचालन, पॉइंट और क्रॉसिंग पर भी आसान होगी ट्रैक की पैकिंग; उत्तर मध्य रेलवे स्वदेशी मशीन विकसित करने की दिशा में करेगा प्रयास।
प्रयागराज, 24 अक्टूबर। रेलवे ट्रैक के अनुरक्षण को अधिक तेज, सुगम और किफायती बनाने के लिए उत्तर मध्य रेलवे आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहा है। इसी क्रम में रेलवे ट्रैक की पैकिंग के लिए पोर्टेबल हाइड्रोलिक टैम्पिंग मशीन का प्रयोग किया जा रहा है। इस मशीन की मदद से उन स्थानों पर भी ट्रैक का अनुरक्षण आसानी से किया जा सकेगा, जहां पैकिंग ढीली हो गई है और तुरंत मरम्मत की जरूरत है। इससे समय और श्रम की बचत के साथ रेल परिचालन की संरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।
उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के नेतृत्व में ट्रैक अनुरक्षण के लिए नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है। पोर्टेबल हाइड्रोलिक टैम्पिंग मशीन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह मशीन रेलवे यार्ड, साइडिंग और उन स्थानों पर उपयोगी है, जहां बड़ी अनुरक्षण मशीनों को ले जाना कठिन होता है।
एक बार में एक स्लीपर की प्रभावी पैकिंग
मशीन में चार टैम्पिंग उपकरण लगे हैं। यह एक स्लीपर के दोनों सिरों की क्रमवार पैकिंग कर सकती है। इसकी कंपन आवृत्ति भारी ट्रैक अनुरक्षण मशीनों के समान रखी गई है, जिससे प्रभावी और मजबूत पैकिंग में मदद मिलती है। मशीन का उपयोग यार्ड की पटरियों के साथ-साथ कठिन पॉइंट और क्रॉसिंग पर भी किया जा सकता है।
चार कर्मचारी ही कर सकेंगे संचालन
पोर्टेबल और ऑफ-ट्रैक डिजाइन वाली इस मशीन को जरूरत पड़ने पर आसानी से मुख्य ट्रैक से हटाकर किनारे खड़ा किया जा सकता है। इससे कार्यस्थल पर उपलब्ध जगह का बेहतर उपयोग होता है और बड़ी मशीनों पर निर्भरता कम होती है। इसके संचालन के लिए अधिकतम चार कर्मचारियों की जरूरत होती है। इस कारण पारंपरिक तरीके से हाथों से की जाने वाली ट्रैक पैकिंग की तुलना में समय और श्रम की बचत होती है।
स्वदेशी मशीन विकसित करने पर जोर
वर्तमान में यह मशीन आयातित है। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने इसमें व्यावहारिक सुधार करते हुए इसका स्वदेशी संस्करण विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इससे भविष्य में मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जनसंपर्क अधिकारी का वर्जन
उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि पोर्टेबल हाइड्रोलिक टैम्पिंग मशीन से ट्रैक अनुरक्षण अधिक प्रभावी और सुविधाजनक होगा। कम कर्मचारियों की मदद से कम समय में पैकिंग का काम किया जा सकेगा। पॉइंट और क्रॉसिंग जैसे कठिन स्थानों पर भी इसका उपयोग उपयोगी साबित होगा। स्लीपरों की उचित और समय पर पैकिंग से ट्रैक की गुणवत्ता बनाए रखने तथा रेल परिचालन की संरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी। मशीन में सुधार कर उसका स्वदेशी संस्करण विकसित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।