IIIT इलाहाबाद के Global Alumni Meet-2026 में नवाचार और स्टार्टअप पर मंथन, प्रो. भीम सिंह बोले- नई पीढ़ी के मार्गदर्शक बनें पूर्व छात्र

झलवा कैंपस में दो दिवसीय Global Alumni Meet का शुभारंभ हुआ। AI, IoT, शोध, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा पर चर्चा के साथ पूर्व छात्रों से विद्यार्थियों को मेंटरशिप और स्टार्टअप मार्गदर्शन देने की अपील की गई।

IIIT इलाहाबाद के Global Alumni Meet-2026 में नवाचार और स्टार्टअप पर मंथन, प्रो. भीम सिंह बोले- नई पीढ़ी के मार्गदर्शक बनें पूर्व छात्र

प्रयागराज, 13 सितंबर । आईआईआईटी इलाहाबाद के पूर्व छात्र नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे उन्नत क्षेत्रों में मार्गदर्शन और परामर्श दें। साथ ही संस्थान के डिजिटल बदलाव और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करने में सक्रिय योगदान करें। यह आह्वान विज्ञान श्री पुरस्कार से सम्मानित तथा एनएसयूटी, नई दिल्ली के प्रो. भीम सिंह ने रविवार को आईआईआईटी इलाहाबाद में दो दिवसीय वार्षिक ग्लोबल एल्युमनी मीट-2026 के शुभारंभ अवसर पर किया।



झलवा स्थित परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व छात्र-छात्राएं अपने परिवार के साथ शामिल हुए। प्रो. भीम सिंह ने कहा कि पूर्व छात्रों के अनुभव वर्तमान विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि देश में स्टार्टअप का वातावरण तेजी से मजबूत हो रहा है। ऐसे में पूर्व छात्र नई पीढ़ी के उद्यमियों को प्रेरित करने के साथ उन्हें सही दिशा भी दे सकते हैं। उन्होंने संस्थान को देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर दिया।

संस्थान के निदेशक प्रो. मुकुल शरद सुतावने ने ग्लोबल एल्युमनी मीट को पूर्व छात्रों के लिए घर वापसी का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि महज 26 वर्षों में आईआईआईटी इलाहाबाद ने देश में प्रतिष्ठित संस्थान और ब्रांड के रूप में पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि संस्थान के चार विद्यार्थियों को 1.58 करोड़ रुपये का सर्वोच्च पैकेज मिला है। पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विकसित किया गया है और मास्टर डिग्री के कार्यक्रमों का भी विस्तार किया गया है।

निदेशक ने कहा कि आईआईआईटी इलाहाबाद देश का पहला आईआईआईटी है, जिसने दोहरी डिग्री कार्यक्रम शुरू किए हैं। शोध, पेटेंट, स्टार्टअप और उद्योगों के साथ सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संस्थान में नए छात्रावास और व्याख्यान कक्ष बनाए गए हैं तथा कक्षाओं में डिजिटल बोर्ड और पोडियम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि हाल में आयोजित दीक्षांत समारोह में 720 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।

प्रो. जे. रामकुमार ने पूर्व छात्रों से अपने अनुभव वर्तमान विद्यार्थियों के साथ साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने समय, प्रतिभा, संसाधन और प्रेरणा के माध्यम से संस्थान से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों को सीड फंडिंग, संस्थापक स्तर की इंटर्नशिप और असफलताओं से सीखने के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

टॉरल इंडिया के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी भारत गिते ने ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए वैश्विक स्तर पर पूर्व छात्रों के नेटवर्क को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने सभी स्नातक विद्यार्थियों से पूर्व छात्र संघ से सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान किया।

एल्युमनी एवं एक्सटर्नल अफेयर्स के डीन प्रो. अनुपम अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट की प्रदर्शनी के साथ संस्थान से जुड़े स्टार्टअप के प्रदर्शन और उनके उत्पादों का प्रस्तुतिकरण भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एल्युमनी एसोसिएशन का नेटवर्क अब छह हजार से अधिक पूर्व छात्रों तक पहुंच चुका है। पूर्व छात्रों द्वारा विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे उन्हें विशेषज्ञों से उपयोगी सुझाव और उद्योग जगत से संपर्क का अवसर मिलेगा।

एल्युमनी गेस्ट ऑफ ऑनर अंसुमान पाट्रो ने उद्यमिता, भौतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार पर विचार रखे। डेलॉइट कंसल्टिंग के साइबर सुरक्षा इंजीनियरिंग प्रबंधक सौमित्र बालेश्वर गोविल ने बदलते साइबर सुरक्षा परिदृश्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव पर चर्चा की। आईआईटी गोवा के सहायक प्रोफेसर डॉ. शीतला प्रसाद ने अपने शैक्षणिक एवं पेशेवर सफर के अनुभव साझा किए। भारत मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक-ई डॉ. रमेश रागला ने भी संस्थान से जुड़े अपने अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए।

शाम को सांस्कृतिक संध्या में सरोज ढींगरा के संयोजन में मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां हुईं। इसके बाद हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें शायरा शबीना अदीब, गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना, हास्य-व्यंग्य कवि अनिल अग्रवंशी, गीतकार शैलेंद्र मधुर और ओज के कवि उपेंद्र पांडेय ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर और आनंदित किया।

निदेशक प्रो. मुकुल शरद सुतावने ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान है और अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, पूर्व छात्र, शिक्षक और विशिष्टजन मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अनुपम अग्रवाल ने किया।