एआई का अनुकरण बढ़ा तो खत्म हो जाएगी मानव की सृजनशीलता : प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह
एआई का अनुकरण बढ़ा तो खत्म हो जाएगी मानव की सृजनशीलता : प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह
प्रयागराज, 05 सितंबर। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधुनिक समाज को अपने अनुसार संचालित कर रही है। यदि मानव ने एआई का इसी प्रकार अनुकरण जारी रखा तो भविष्य में उसकी सृजनशीलता समाप्त हो सकती है। इसलिए एआई का प्रयोग एक निश्चित मर्यादा में रहकर ही किया जाना चाहिए।
यह बात पं. गोविन्द वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान शोध संस्थान, झूंसी, प्रयागराज के निदेशक एवं सेमिनार के मुख्य वक्ता प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कही।
ठा. हर नारायण सिंह डिग्री कॉलेज, करैलाबाग, प्रयागराज एवं प्रज्ञा प्रवाह के संयुक्त तत्वावधान में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता का शिक्षा, समाज और राजनीति पर प्रभाव’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों को एआई के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए भारतीय संस्कृति और पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से इसके प्रभाव को समझाया।
उन्होंने रामायण के प्रसंगों का उदाहरण देते हुए सोने के हिरण और रावण के साधुवेश को एआई के स्वरूप से जोड़ा। लक्ष्मण द्वारा खींची गई रेखा को उन्होंने मर्यादा का प्रतीक बताया। इसी प्रकार गुरु द्रोणाचार्य और एकलव्य के प्रसंग के माध्यम से भी एआई के उपयोग और उसकी सीमाओं को रोचक ढंग से समझाया।
सेमिनार में प्रो. विवेक कुमार सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं अध्यक्ष, समाज कार्य विभाग, प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने एआई के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ज्ञान वृद्धि के लिए एआई उपयोगी और आवश्यक है, लेकिन यदि मानव जीवन एआई के अनुसार संचालित होने लगा तो भविष्य में मानव समाज के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रबंधक देवेन्द्र सिंह चन्देल ने की। इस अवसर पर निदेशक डॉ. उदय प्रताप सिंह, उपनिदेशक इं. विनय प्रताप सिंह तथा समिति के अध्यक्ष गोविन्द बिहारी मिश्रा सहित प्राचार्य, अन्य गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के डॉ. सुभाष चन्द्र ने किया।