हत्या के मामले में चार दाेषियाें को आजीवन कारावास

हत्या के मामले में चार दाेषियाें को आजीवन कारावास

हत्या के मामले में चार दाेषियाें को आजीवन कारावास

नोएडा, 18 जुलाई । थाना दनकौर क्षेत्र के बिलासपुर गांव में वर्ष 2016 में पुरानी रंजिश के चलते युवक की गोली मारकर की गई हत्या के मामले में जनपद गौतम बुद्ध नगर की अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने शनिवार काे बिलासपुर निवासी दानिश, अलीम, यामीन और इब्राहिम को हत्या का दोषी मानते हुए प्रत्येक पर 60-60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। दानिश और अलीम को अवैध हथियार रखने के मामले में आयुध अधिनियम के तहत अलग से तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) रोहताश शर्मा के अनुसार 23 नवंबर 2016 की शाम करीब साढ़े छह बजे बिलासपुर निवासी जुबैर उर्फ गुड्डू अपने घर के बाहर खड़ा था। उसी दौरान मोहल्ले के रहने वाले दानिश, उसका भाई अलीम, यामीन और इब्राहिम वहां पहुंचे और पुरानी रंजिश को लेकर विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि चारों ने पहले गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद दानिश और इब्राहिम ने जुबैर को पकड़ लिया, जबकि यामीन और अलीम ने तमंचों से उस पर गोली चला दी। गंभीर रूप से घायल जुबैर को कैलाश अस्पताल, ग्रेटर नोएडा ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद मृतक के चचेरे भाई आबिद की तहरीर पर दनकौर कोतवाली में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच छह-सात महीने पहले भी विवाद हुआ था और उसी रंजिश में हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया। जांच के दौरान पुलिस ने दानिश और अलीम को अलग-अलग समय पर अवैध तमंचा और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था, जिसके आधार पर उनके खिलाफ आयुध अधिनियम के तहत भी मुकदमे दर्ज किए गए। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 16 गवाह अदालत में पेश किए। हालांकि घटना के चार प्रत्यक्षदर्शियों में से मृतक के भाई एवं वादी को छोड़कर अन्य तीन गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए और उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया। इसके बावजूद अदालत ने माना कि उनके बयानों से बचाव पक्ष को कोई विशेष लाभ नहीं मिला। साथ ही आरोपियों के कब्जे से अवैध हथियारों की बरामदगी और उनके संबंध में कोई वैध दस्तावेज या संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत न किए जाने को भी अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।

सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने की अपील करते हुए यामीन और इब्राहिम की अधिक उम्र एवं बीमारी का हवाला दिया। वहीं दानिश और अलीम के संबंध में कहा गया कि वे परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) रोहताश शर्मा ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड की मांग की। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की घटना समाज में भय और अशांति फैलाती है, इसलिए नरमी का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने चारों दोषियों को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए अर्थदंड भी लगाया। जुर्माना अदा न करने पर प्रत्येक दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।