मौत के मुंह से जिंदगी छीन लाए मेडिकल कॉलेज खीरी के जांबाज डॉक्टर्स
खीरी में पहली बार हुई हाई-रिस्क ट्रेकियोस्टॉमी, कैंसर पीड़िता को मिला नया जीवन
लखीमपुर खीरी, 01 जुलाई । "डॉक्टरों को यूं ही भगवान का रूप नहीं कहा जाता। जब सांसें आख़िरी पड़ाव पर हों और उम्मीदें दम तोड़ रही हों, तब डॉक्टर्स अपनी काबिलियत से मौत के मुंह से भी जिंदगी को छीन लाते हैं।" कुछ ऐसा ही कर दिखाया है स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज (एएसएमसी) खीरी के ईएनटी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अमित सिंह और उनकी जांबाज टीम सहित आर्थो विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पुलकित, डॉ. शरद व सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आलोक, एनेस्थेटिक डॉ. राजीव सिंह का पूर्ण सहयोग रहा, जिससे यह सफल सर्जरी संभव हो सकी।
चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान रचते हुए अस्पताल में पहली बार अत्यंत जटिल एवं उच्च जोखिम वाली जीवनरक्षक ट्रेकियोस्टॉमी शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है। इस सफल ऑपरेशन से एडवांस्ड लैरिंजियल कार्सिनोमा (गले के एडवांस्ड कैंसर) से तड़प रही एक महिला मरीज को मौत के मुहाने से वापस लाकर नया जीवनदान दिया गया।
सांसों पर मंडरा रहा था संकट, थमने वाली थी धड़कनें
नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ सहायक आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ अमित सिंह के मुताबिक, महिला मरीज गीता (56) निवासी ग्राम सेमरा थाना पडुआ (बदला हुआ नाम) पिछले कई दिनों से जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी। कैंसर की भयावहता के कारण उसका स्वरयंत्र (Larynx) और श्वासनली का मार्ग लगभग पूरी तरह ब्लॉक हो चुका था। स्थिति इतनी नाजुक थी कि मरीज चंद सांसों के लिए तड़प रही थी और किसी भी पल उसका दम घुट सकता था। ऐसे आपातकालीन समय में ईएनटी विभाग के प्रोफेसर और विशेषज्ञों की टीम ने बिना एक पल गंवाए, तत्काल इस बेहद जोखिम भरे ऑपरेशन को करने का साहसिक निर्णय लिया।
चुनौतीपूर्ण थी राह: TIVA तकनीक से बनाया नया सांस मार्ग
मरीज की अत्यंत गंभीर स्थिति को देखते हुए यह ऑपरेशन टोटल इंट्रावेनस एनेस्थीसिया (TIVA) के अंतर्गत किया गया। एडवांस्ड लैरिंजियल कैंसर के कारण गले की सामान्य शारीरिक संरचना पूरी तरह बदल चुकी थी और वायुमार्ग बेहद संकरा था, जिससे ऑपरेशन के दौरान ही सांस पूरी तरह बंद होने का सबसे बड़ा खतरा था।
लेकिन ईएनटी विभाग के प्रोफेसर और उनकी टीम के सटीक तालमेल ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया। सर्जन्स ने बेहद बारीकी से गर्दन पर एक छोटा चीरा लगाकर श्वासनली तक सुरक्षित पहुंच बनाई और उसमें 'ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब' फिट कर एक नया कृत्रिम वायुमार्ग तैयार किया। ट्यूब लगते ही मरीज के फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंची और उसकी थमती सांसें फिर से बहाल हो गईं।
इन महारथियों ने निभाई जीवनरक्षक भूमिका
यह अत्यंत चुनौतीपूर्ण और ऐतिहासिक ऑपरेशन प्रधानाचार्या डॉ. वाणी गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके कोहली के विशेष सहयोग से संपन्न हुआ।
प्रधानाचार्य प्रो. वाणी गुप्ता ने बताया कि विभागाध्यक्ष व प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार सिंह ने प्रथम सर्जन के रूप में मोर्चा संभाला और मौत के मुंह से जिंदगी को खींच लाए। एनेस्थीसिया विभाग, ऑपरेशन थिएटर (OT) स्टाफ और नर्सिंग टीम के त्वरित फैसलों व उत्कृष्ट समन्वय ने इस नामुमकिन सर्जरी को सफल बनाया।
कामयाबी का 'डबल धमाका': पहले भी किया है कमाल
एएसएमसी खीरी के ईएनटी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने हाल ही में थाइरोग्लॉसल डक्ट सिस्ट (गले की एक दुर्लभ और जटिल बीमारी) का सफल इलाज सिस्ट्रंक प्रोसीजर (Sistrunk Procedure) के जरिए किया था। उस ऑपरेशन में टीम ने गले के सिस्ट के साथ-साथ 'हायॉइड बोन' के मध्य भाग को भी सुरक्षित निकालकर मरीज को हमेशा के लिए रोगमुक्त किया था। वह ऑपरेशन भी जिले के इतिहास में पहली बार हुआ था।
महानगरों की दौड़ से मिली मुक्ति, खीरी में ही मिलेगा वर्ल्ड क्लास इलाज
लगातार दो बड़े और अत्यंत जटिल ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एएसएमसी खीरी ने साबित कर दिया है कि उनकी चिकित्सकीय विशेषज्ञता और आधुनिक सुविधाएं किसी बड़े कॉर्पोरेट अस्पताल से कम नहीं हैं। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर के बाद अब लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को कैंसर व ईएनटी से जुड़ी जटिल सर्जरी के लिए लखनऊ या दिल्ली जैसे बड़े महानगरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा। उन्हें अपने ही जिले में बेहद किफायती और उच्च गुणवत्ता वाला इलाज मिल सकेगा।
इस अभूतपूर्व कामयाबी पर प्रधानाचार्या डॉ. वाणी गुप्ता और सीएमएस डॉ. आरके कोहली सहित पूरे मेडिकल कॉलेज स्टाफ ने ईएनटी विभाग की टीम को बधाई दी है और इसे जिले के स्वास्थ्य इतिहास का स्वर्णिम दिन बताया है।