दिल्ली: गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये का बायोगैस प्लांट शुरू, रोजाना 200 टन गोबर का होगा प्रसंस्करण
दिल्ली: गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये का बायोगैस प्लांट शुरू, रोजाना 200 टन गोबर का होगा प्रसंस्करण
नई दिल्ली, 19 अक्टूबर। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को नजफगढ़ क्षेत्र में स्थित गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित 200 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया। दिल्ली नगर निगम द्वारा स्थापित यह संयंत्र गोबर के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, स्वच्छ ईंधन के उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे गोबर को नालियों के माध्यम से यमुना में जाने से रोकने, क्षेत्र में स्वच्छता बेहतर बनाने और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर दिल्ली सरकार के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद, दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही, उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत, विधायक संदीप सहरावत सहित परियोजना से जुड़े प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में दिल्ली में डेयरी कॉलोनियों की बुनियादी सुविधाओं, जैसे नालियों, ड्रेनेज, पानी की आपूर्ति, कूड़ा उठाने और गोबर संग्रहण की व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। वर्षों तक दिल्ली में एक भी बायोगैस प्लांट स्थापित नहीं किया गया, जिसके कारण गोबर के उचित प्रबंधन की समस्या बनी रही। वर्तमान सरकार ने पिछले डेढ़ वर्ष में तीन बायोगैस प्लांट शुरू किए। छह अन्य प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नंगली सकरावती संयंत्र में एक वर्ष में 55 हजार टन गोबर इस्तेमाल हो चुका है और इसके लिए किसानों कों साढ़े तीन करोड़ रुपये भी अदा किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली की डेयरी कॉलोनियों में नालियों के निर्माण और ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार के लिए 50 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘वेस्ट टू वेल्थ’ का संकल्प अपशिष्ट को संसाधन में बदलकर विकास और पर्यावरण संरक्षण के नए अवसर पैदा करने की प्रेरणा देता है। गोयला डेयरी का बायोगैस प्लांट इसी सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गोबर को नालियों में बहाने के बजाय उससे स्वच्छ ईंधन और प्राकृतिक खाद तैयार करना संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण है। इस तरह की पहल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना को निर्मल बनाने के लिए प्रदूषण को उसके स्रोत पर रोकना आवश्यक है। केवल नदी की सफाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन कारणों पर भी प्रभावी कार्रवाई करनी होगी, जिनसे प्रदूषक नदी तक पहुंचते हैं। गोयला डेयरी क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 200 मीट्रिक टन गोबर उत्पन्न होता है, जिसके उचित निस्तारण की व्यवस्था न होने पर इसके नालियों के जरिए यमुना में पहुंचने से प्रदूषण बढ़ने का खतरा है। इस समस्या के समाधान के लिए स्थापित संयंत्र प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन गोबर का प्रसंस्करण कर बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन करेगा। इससे प्रतिदिन लगभग 14,000 घन मीटर कच्ची बायोगैस और करीब 5.6 टन शुद्ध कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादित होने का अनुमान है, जिसकी आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड को की जाएगी। वहीं, प्रसंस्करण के बाद बचने वाली बायोगैस स्लरी का उपयोग प्राकृतिक खाद के रूप में होगा, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी। इस प्रकार, गोबर को उपयोगी संसाधन में बदलकर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, कृषि लाभ और यमुना प्रदूषण की रोकथाम में मदद मिलेगी।
इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय पशुपालकों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा। परियोजना के तहत एजेंसी डेयरी संचालकों से 67 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से गोबर एकत्र करेगी, जिससे उसके निस्तारण की समस्या कम होगी और वह आर्थिक रूप से उपयोगी संसाधन बनेगा।
मुख्यमंत्री ने डेयरी संचालकों और स्थानीय नागरिकों से गोबर नालियों में बहाने के बजाय निर्धारित संग्रहण व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की। साथ ही, संबंधित अधिकारियों और संयंत्र संचालकों से गोबर का नियमित संग्रहण, सुरक्षित प्रसंस्करण और संयंत्र का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की।
इस अवसर पर मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पिछली सरकारों ने पॉश कॉलोनियों से डेयरियों को डेयरी फार्मों में तो स्थानांतरित किया, लेकिन गोबर के वैज्ञानिक निस्तारण और बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए पर्याप्त काम नहीं किया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर निगम की परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई है। दिल्ली अब बहानों और देरी के बजाय ठोस कार्य और परिणाम चाहती है। यह प्लांट केवल एक संयंत्र का उद्घाटन नहीं, बल्कि विकास और प्रशासनिक जवाबदेही की नई सोच का प्रतीक है।
महापौर ने कहा कि आज दिल्ली नगर निगम द्वारा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र से गोबर एवं डेयरी अपशिष्ट से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की यह पहल बेहतर कचरा प्रबंधन और यमुना में प्रदूषण कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
महापौर ने कहा कि निगम जनसेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।