Senior Citizen Card के नाम पर रिटायर्ड बैंक अधिकारी से ₹5.63 लाख की ठगी, पुलिस ने ₹5.57 लाख लौटाए
पेंशन बंद होने और सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने का झांसा देकर साइबर अपराधियों ने छह बैंक खातों से रकम उड़ाई; चिलुआताल पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़ी रकम सुरक्षित हुई।
सीनियर सिटीजन कार्ड के नाम पर सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से साइबर ठगी, पुलिस ने लौटाए 5.57 लाख रुपये
गोरखपुर, 05 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में जनपद गोरखपुर में साइबर अपराधियों ने पेंशन बंद होने और सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने का झांसा देकर सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी के छह बैंक खातों से लाखों रुपये उड़ा दिए। ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित ने थाना चिलुआताल में शिकायत दर्ज कराई। मामले में चिलुआताल पुलिस की साइबर सेल टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से संबंधित रकम को होल्ड कराया। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर पीड़ित को कुल 5,57,001 रुपये वापस करा दिए गए।
साइबर अपराधियों ने अलग-अलग प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं के नाम पर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया और उसके छह बैंक खातों से कुल 5,63,001 रुपये की धोखाधड़ी कर ली। खाते से रकम निकलने की जानकारी होने के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की।
शिकायत मिलते ही चिलुआताल पुलिस की साइबर सेल टीम सक्रिय हुई और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर ठगी की रकम को संबंधित स्तर पर होल्ड कराने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते ठगी गई रकम का बड़ा हिस्सा सुरक्षित कराया जा सका।
इसके बाद न्यायालय के आदेश के क्रम में अलग-अलग तिथियों में पीड़ित के खाते में रकम वापस कराई गई।
पुलिस के मुताबिक 14 जनवरी 2026 को 1,62,872.83 रुपये, 2 फरवरी 2026 को 1,85,128.17 रुपये तथा 5 सितंबर 2026 को 2,09,000 रुपये पीड़ित के खाते में वापस कराए गए। इस प्रकार कुल 5,57,001 रुपये की धनराशि पीड़ित को वापस मिली। साइबर ठगी में गई रकम वापस मिलने पर पीड़ित को बड़ी राहत मिली।
चिलुआताल पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन पर अपनी बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी, एटीएम/डेबिट कार्ड विवरण, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। पेंशन, बैंकिंग सुविधा, सीनियर सिटीजन कार्ड अथवा किसी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर यदि कोई व्यक्ति फोन कर पैसे की मांग करता है तो पहले संबंधित विभाग या बैंक से इसकी पुष्टि करें। साइबर ठगी होने की स्थिति में बिना देरी किए 1930 साइबर हेल्पलाइन अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि ठगी की रकम को समय रहते होल्ड कराया जा सके।