माँ भारती के प्रति हमारी भक्ति और समर्पण का प्रतीक है वंदे मातरम: मंत्री नंदी

माँ भारती के प्रति हमारी भक्ति और समर्पण का प्रतीक है वंदे मातरम: मंत्री नंदी

माँ भारती के प्रति हमारी भक्ति और समर्पण का प्रतीक है वंदे मातरम: मंत्री नंदी

प्रयागराज, 27 जनवरी । वंदे मातरम केवल एक शब्द नहीं है-यह एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है और एक पवित्र संकल्प है। वंदे मातरम माँ भारती के प्रति हमारी भक्ति और हमारे समर्पण का प्रतीक है। यह मंगलवार को प्रयागराज के खुल्दाबाद, हिम्मतगंज, लूकरगंज संयुक्त व्यापार मण्डल द्वारा राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर हिम्मतगंज में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि उप्र सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने कही।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम हमें हमारे इतिहास से जोड़ता है, हमारे वर्तमान को आत्मविश्वास से भर देता है। हमें यह विश्वास दिलाता है कि कोई भी संकल्प साकार होना असंभव नहीं है। कोई भी लक्ष्य प्राप्त करना असंभव नहीं है।

मंत्री नन्दी ने कहा कि आज पूरा देश वंदे मातरम के गौरवशाली 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है। यह विशिष्ट उपलब्धि एक देशभक्त नागरिक के रूप में हमारे भीतर एक नई प्रेरणा और एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है। वंदे मातरम आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना, आजादी के आंदोलन के समय था। एक समय यह क्रांतिकारियों का उद्घोष था, भारत की आजादी का महामंत्र था। यह गीत प्रकृति के आशीर्वाद से सुशोभित हमारी मातृभूमि के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है और उसकी महानता का गुणगान करता है।

बंकिम बाबू ने जब वंदे मातरम की रचना की, तब भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था। मुगलों और अंग्रेजों के दमन से भारत गरीबी और भुखमरी के चंगुल में जकड़ा हुआ था। ऐसे समय में बंकिम बाबू ने एक समृद्ध, सशक्त और खुशहाल भारत की कल्पना की थी। यह देश की आजादी के लिए अपना बलिदान देने वाले अनगिनत आजादी के नायकों का भी सपना था।

आज भारत के महान बलिदानी सपूतों का सपना साकार हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित हुआ है। आज पूरी दुनिया भारत की चमक और धमक को महसूस कर रही है। प्रधानमंत्री ने पिछले 11 वर्षों के दौरान वंदे मातरम् की कल्पनाओं को वास्तविकता में बदला है। आज जब हम वंदे मातरम के गौरवशाली 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं तो यह देश के महान नायकों को भी सच्ची श्रद्धांजलि है। जिन्होंने वंदे मातरम का उद्घोष करते हुए हंसते-हंसते फांसी के फंदों को गले लगा लिया।

आज वंदे मातरम भारत की तरक्की और सामर्थ्य का प्रतीक बन गया है। जब भारतीय सेना दुश्मन के घर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और आपरेशन सिंदूर को अंजाम देती है, तब 140 करोड़ भारतवासी गर्व के साथ वंदे मातरम का उद्घोष करते हैं। जब भारत किकेट का विश्वकप जीतता है, तब 140 करोड़ भारतवासी उमंग के साथ वंदे मातरम का उद्घोष करते हैं। जब भारत का होनहार बेटा शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में तिरंगा लहराता है, तब 140 करोड़ भारतवासी उत्साह के साथ वंदे मातरम का उद्घोष करते हैं।

इस मौके पर अध्यक्ष सुरेश गुप्ता, कोषाध्यक्ष विकास वर्मा, महामंत्री अरूण श्रीवास्तव (पप्पू), उपाध्यक्ष शाने मोहम्मद, राकेश साहू, कमल वासन, प्रवीण केसरवानी, बिजेन्द्र बाजपेयी व राघवेन्द्र गोयल, उपमंत्री मनोज द्विवेदी, अनूप जायसवाल, संगठन मंत्री सुनील विश्वकर्मा, विजय शंकर मिश्रा, बब्बू जायसवाल, अजय श्रीवास्तव, विधि सलाहकार बालकृष्ण मिश्रा, शासकीय अधिवक्ता डॉ. प्रभुनारायण श्रीवास्तव, मीडिया प्रभारी रजत अरोरा, हेमन्त छाबड़ा, आर.एस. तिवारी, संदीप कुमार, व्यापार मण्डल के युवा सदस्य शशांक कुमार (अंशू), शुभम् केशरवानी, समर्थ शर्मा, प्रतीक गुप्ता, पवन केशरवानी, संतोष गुप्ता, उदित केसरवानी, हनु केसरवानी, अंशू केसरवानी, संरक्षक अनिल कुमार गुप्ता (अन्नू भइया), चौधरी सईद अहमद आदि मौजूद रहे।