तुलसी साहित्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर : प्रो विवेक पांडेय

--शोधार्थी आचार्य राजेश कुमार मिश्र का प्री पीएचडी सेमिनार

तुलसी साहित्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर : प्रो विवेक पांडेय

प्रयागराज, 08 मई । हण्डिया पीजी कॉलेज, हिन्दी विभाग के शोधार्थी आचार्य राजेश कुमार मिश्र का प्री-पीएच.डी सेमिनार का शुक्रवार को समापन हुआ। शोधार्थी आचार्य राजेश कुमार मिश्र ने अपने शोध विषय ‘तुलसी के साहित्य में श्रीराम का स्वरूप विकास: एक अध्ययन” पर अपने शोध विचार प्रस्तुत किए।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो (डॉ) विवेक पांडेय ने कहा कि तुलसी साहित्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर है तथा इस प्रकार के शोधकार्य समाज और साहित्य दोनों को नई वैचारिक दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने शोध निर्देशक डॉ प्रद्युम्न सिंह के विद्वत्तापूर्ण एवं अनुकरणीय निर्देशन की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में शोधार्थियों को गंभीर अध्ययन, मौलिक चिंतन एवं उच्चस्तरीय शोध दृष्टि प्राप्त हो रही है।

शोधार्थी आचार्य राजेश कुमार मिश्र ने अपने व्याख्यान में गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य में श्रीराम के आदर्श, लोकमंगलकारी, करुणामय एवं मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप का गंभीर विश्लेषण करते हुए बताया कि तुलसी साहित्य में श्रीराम केवल धार्मिक श्रद्धा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता एवं लोकजीवन के प्रेरणास्रोत भी हैं। आचार्य राजेश मिश्र ने तुलसी साहित्य में श्रीराम के चरित्र के विकास-क्रम को विभिन्न दृष्टियों से प्रस्तुत करते हुए उसके सांस्कृतिक एवं दार्शनिक महत्व को भी स्पष्ट किया।

इसका आयोजन हिन्दी विभाग के शोध निर्देशक डॉ प्रद्युम्न सिंह के निर्देशन में किया गया। सेमिनार में उपस्थित प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने शोध विषय की गंभीरता एवं प्रस्तुतीकरण की सराहना करते हुए अपने महत्वपूर्ण अकादमिक सुझाव प्रदान किए।

इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में शोध निर्देशक डॉ प्रद्युम्न सिंह ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं उपस्थित प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए शोधार्थी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।