आज के शिशु कल के नागरिक, नेता, वैज्ञानिक और निर्माता होंगे: हीरा सिंह

-ज्वाला देवी गंगापुरी में हुआ द्वितीय सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम

आज के शिशु कल के नागरिक, नेता, वैज्ञानिक और निर्माता होंगे: हीरा सिंह

प्रयागराज, 22 नवम्बर । शिक्षा, संस्कार, परिवार और सामाजिक दायित्व को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से विद्या भारती से सम्बद्ध ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, गंगापुरी रसूलाबाद में ‘द्वितीय सप्तशक्ति संगम’ का आयोजन शनिवार को किया गया।

इस अवसर पर क्षेत्रीय शिशु वाटिका, सह संयोजिका श्रीमती हीरा सिंह ने कहा कि किसी भी देश, समाज या समुदाय का भविष्य उसके वर्तमान बच्चों पर निर्भर करता है। आज के शिशु कल के नागरिक, नेता, वैज्ञानिक और निर्माता होंगे। परिवार और समाज से मिले संस्कार और नैतिक शिक्षा ही उनके चरित्र का निर्माण करती है। एक अच्छे चरित्र वाला नागरिक ही एक आदर्श समाज का निर्माण कर सकता है।

उन्होंने कहा कि शिशु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संभावनाओं का एक पूरा संसार हैं। उनकी परवरिश, शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक दायित्व है। जिस प्रकार एक मजबूत इमारत के लिए मजबूत नींव की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार एक उज्ज्वल और टिकाऊ भविष्य के लिए स्वस्थ, शिक्षित और संस्कारित शिशुओं की आवश्यकता होती है।कार्यक्रम में अध्यक्ष के रूप में मौजूद गाँधी इन्टरमीडिएट काॅलेज की प्रवक्ता श्रीमती सीतेश्वरी तिवारी ने अभिभावकों और बच्चों को भारतीय मूल्यों को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित किया। आज की शिक्षा को किताबी ज्ञान से ऊपर उठकर ‘संस्कार और सामाजिक दायित्व’ की भावना का संचार करना होगा। सह क्षेत्रीय प्रमुख, बालिका शिक्षा श्रीमती निधि द्विवेदी ने कुटुम्ब प्रबोधन और भारतीय संस्कृति के विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ यानी पूरी पृथ्वी एक परिवार है। यह दर्शन सार्वभौमिक भाईचारे की भावना को प्रेरित करता है। भारतीय संस्कृति ने संयुक्त परिवारों पर जोर दिया है, जहां कई पीढ़ियां एक साथ रहती हैं और एक-दूसरे का समर्थन करती हैं। नैतिक मूल्य सत्य, अहिंसा, धर्म, कर्तव्य, सम्मान और बड़ों का आदर करना भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कारों का पालन किया जाता है, जो जीवन को अनुशासित और अर्थपूर्ण बनाते हैं।कवयित्री प्रतिमा पाण्डेय ने महिलाओं की सशक्त भूमिका और पर्यावरण संरक्षण पर कहा कि महिलाओं की सशक्त भूमिका और पर्यावरण एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं। क्योंकि महिलाएं पर्यावरण की संरक्षक होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक भी होती हैं। महिलाएं अक्सर स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र की गहरी समझ रखती हैं और संसाधनों के स्थायी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य युगल किशोर मिश्र ने कार्यक्रम की शुभकामना देते हुए सप्त शक्ति संगम की उपादेयता को बताया। कार्यक्रम की संयोजिका बेबिका राय ने उपस्थित अतिथियों, माताओं एवं समाजसेवी महिलाओं का आभार ज्ञापित किया।