सामाजिक समरसता की अनूठी मिशाल पेश कर रहा संघ का रोटी संग्रह अभियान

- संघ के प्रशिक्षण वर्ग में प्रतिदिन 700 परिवारों से आ रही रोटियां

सामाजिक समरसता की अनूठी मिशाल पेश कर रहा संघ का रोटी संग्रह अभियान

लखनऊ, 02 जून। राजधानी लखनऊ में इन दिनों दो स्थानों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का प्रशिक्षण वर्ग चल रहा है। दोनों वर्गों के शिक्षार्थियों और व्यवस्था में लगे कार्यकर्ताओं के भोजन के लिए प्रतिदिन लखनऊ के 700 परिवारों से रोटियां आ रही हैं। यह रोटियां लखनऊ के अलग-अलग नगरों से हिन्दू समाज के परिवारों से आ रही हैं। स्थानीय संघ कार्यकर्ता एक परिवार से 10 रोटी देने का आग्रह करते हैं। संघ का यह रोटी संग्रह अभियान सामाजिक समरसता की मिशाल पेश कर रहा है।

विभाग प्रचार प्रमुख दुष्यंत ने बताया कि एक वर्ग ''कार्यकर्ता विकास वर्ग- प्रथम'' सरस्वती कुंज निरालानगर में चल रहा है। इस वर्ग में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के चार प्रान्तों के 289 कार्यकर्ता प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसमें नेपाल के भी 25 शिक्षार्थी हैं। वहीं दूसरा 'संघ शिक्षा वर्ग विशेष' सेक्टर क्यू अलीगंज स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में चल रहा है। यहां पर पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के चार प्रान्तों के 195 कार्यकर्ता प्रशिक्षण ले रहे हैं।

इस वर्ग में प्रशिक्षण प्राप्त करने आये कार्यकर्ताओं के लिए आवासीय व्यवस्था है। परिसर से बाहर जाने की मनाही रहती है। उनका भोजन व जलपान भी परिसर में ही होता है। इन दोनों वर्गों में प्रशिक्षण लेने आये शिक्षार्थी और व्यवस्था में लगे कार्यकर्ताओं को मिलाकर 700 से अधिक लोग प्रतिदिन दो समय भोजन करते हैं। इतनी बड़ी संख्या का दो बार भोजन और जलपान देना आसान नहीं होता, वह भी तय समय पर। फिर भी वर्ग की व्यवस्था ऐसी रहती है कि एक घंटे के भीतर ही सारे स्वयंसेवक भोजन कर लेते हैं। दोनों वर्गों के लिए सब्जी, दाल व चावल वर्ग स्थान पर ही बनता है जबकि दोनों समय के भोजन के लिए रोटी परिवारों से ही आती है।



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रान्त प्रचार प्रमुख डॉ. शचीन्द्र शेखर ने बताया कि संघ शिक्षा वर्गों में शिक्षार्थियों के लिए रोटियां परिवारों से बनकर आती हैं। उन्होंने बताया कि उन्नाव में अवध प्रान्त का संघ शिक्षा वर्ग चल रहा है। वहां के वर्ग में भी कई परिवारों से ही रोटियां आ रही हैं। यह पहल समाज को जोड़ने और समरसता की भावना को मजबूत करने का एक जीवंत अनुपम उदाहरण बन चुका है।