प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन तकनीक से ट्राईजेमिनल न्यूराल्जिया का सफल उपचार
दर्द निवारण की दिशा में नए युग की शुरुआत
प्रयागराज, 14 जुलाई । मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध प्रतिष्ठित स्वरूप रानी नेहरू (एस.आर.एन.) चिकित्सालय ने दर्द निवारण के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा है। अस्पताल के इंटरवेंशनल पेन क्लीनिक में पहली बार अत्याधुनिक रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) तकनीक का सफलतापूर्वक प्रयोग करते हुए 'ट्राईजेमिनल न्यूराल्जिया' नामक बेहद कष्टदायी न्यूरोलॉजिकल विकार का उपचार किया गया है। यह उपलब्धि प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है, जिन्हें अब तक इस जटिल बीमारी के इलाज के लिए बड़े महानगरों की ओर रुख करना पड़ता था।
असहनीय पीड़ा: 'आत्महत्या रोग' ट्राईजेमिनल न्यूराल्जिया प्रमुख अधीक्षक एवं एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम सिंह ने सोमवार को इस महत्वपूर्ण सफल उपचार की जानकारी देते हुए बताया कि ट्राईजेमिनल न्यूराल्जिया चेहरे के आधे हिस्से में होने वाला एक अत्यधिक गंभीर दर्द है, जिसे अक्सर "बिजली के झटकों" या "तेज छुरा घोंपने" जैसी पीड़ा के रूप में वर्णित किया जाता है। यह दर्द इतना तीखा और असहनीय होता है कि इसे 'सुसाइड डिजीज' या 'आत्महत्या रोग' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है और उन्हें निराशा की ओर धकेल सकता है। इसमें मस्तिष्क की ट्राईजेमिनल नस में गांठ बनने या उसके संपीड़न (कम्प्रेशन) के कारण चेहरा झनझनाने लगता है और सिर फोड़ देने वाला दर्द महसूस होता है, जो सामान्य दर्द निवारक दवाओं से ठीक नहीं होता।
24 महीने की पीड़ा का अंत: एक मरीज की दास्तान डॉ. नीलम सिंह ने बताया कि हाल ही में, एक 23 वर्षीय महिला मरीज स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के न्यूरोसर्जरी विभाग में पहुँची। वह पिछले 24 महीनों से ट्राईजेमिनल न्यूराल्जिया की इस असहनीय पीड़ा से जूझ रही थी। उसकी हालत इतनी खराब थी कि वह सामान्य कार्य करने, बात करने या खाना खाने में भी असमर्थ थी। पारंपरिक दवाइयों से उसे कोई खास राहत नहीं मिल रही थी, जिससे उसके जीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था।
रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA): एक अभिनव समाधान मरीज की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, उसे मेडिकल कॉलेज के अत्याधुनिक पेन क्लीनिक में भेजा गया। यहाँ, विशेषज्ञ इंटरवेंशनल पेन फिजीशियन डॉ. अभिजीत मोहिते ने मरीज का गहन परीक्षण किया और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) प्रक्रिया की सलाह दी। डॉ. मोहिते ने बताया कि यह एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें एक विशेष उपकरण (पतली सुई) को फोरामेन ओवेल नामक सुरक्षित मार्ग से दिमाग की संबंधित नस (ट्राईजेमिनल गैन्ग्लियन) तक पहुँचाया जाता है। इस उपकरण के माध्यम से रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगों का उपयोग करके दर्द पैदा करने वाले तंत्रिका रेशों को लक्षित रूप से निष्क्रिय (संज्ञाशून्य) कर दिया जाता है, जिससे दर्द के संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचने से प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। प्रक्रिया के तुरंत बाद, मरीज को दशकों से परेशान कर रहे दर्द से पूर्ण और तत्काल राहत मिली, जो चिकित्सा जगत में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
प्रयागराज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि यह प्रक्रिया, जो अब तक केवल महानगरों के चुनिंदा और विशेष केंद्रों जैसे दिल्ली, मुंबई में ही उपलब्ध थी, का प्रयागराज में पहली बार सफलतापूर्वक उपयोग किया जाना चिकित्सा क्षेत्र में दर्द निवारण की दिशा में एक विशिष्ट और ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। यह न केवल स्थानीय मरीजों के लिए अत्याधुनिक उपचारों की पहुंच को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें महंगे और दूरस्थ यात्राओं से भी मुक्ति दिलाएगा।
चिकित्सा टीम की दक्षता और समर्पण का प्रमाण एस.आर.एन. प्रमुख अधीक्षक एवं एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नीलम सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "ट्राईजेमिनल न्यूराल्जिया जैसी जटिल और कष्टदायी बीमारी का अत्याधुनिक इलाज अब हमारे अपने शहर प्रयागराज में संभव हो पाया है। यह हमारे पेन क्लीनिक की असाधारण उपलब्धि है, जो न केवल तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे क्षेत्रीय मरीजों को दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों के महंगे और दूरस्थ उपचार केंद्रों पर निर्भरता से भी मुक्ति मिलेगी। यह हमारे चिकित्सकों की उच्च दक्षता, समर्पण और टीम वर्क का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जो मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सफल उपचार एस.आर.एन. चिकित्सालय को एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ अब गंभीर और जटिल दर्द के मामलों का भी प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सकेगा।