उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में पेपरलेस, फेसलेस और कैशलेस प्रक्रिया का सफल कार्यान्वयन: लंबित ड्राइविंग लाइसेंस आवेदनों में भारी कमी
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में पेपरलेस, फेसलेस और कैशलेस प्रक्रिया का सफल कार्यान्वयन: लंबित ड्राइविंग लाइसेंस आवेदनों में भारी कमी
लखनऊ, 19 जून : उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त बृजेश नारायण सिंह ने एक प्रेस वार्ता में विभाग द्वारा किए जा रहे पेपरलेस, फेसलेस और कैशलेस अभियान के सकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी, 2024 से 10 जून, 2024 के बीच नए ड्राइविंग लाइसेंस आवेदनों की पेंडेंसी का गहन विश्लेषण किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विभाग द्वारा लागू की गई नई प्रक्रियाएं आवेदकों के लिए काफी सुविधाजनक साबित हो रही हैं।
आयुक्त बृजेश नारायण सिंह ने कहा कि विभाग के निरंतर प्रयासों से लाइसेंस प्रक्रिया अब अधिक सरल, त्वरित और पारदर्शी हो गई है। उन्होंने सभी जिलों को यह सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लंबित मामलों का अनुमोदन 7 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने उन जिलों के अधिकारियों से, जो अपेक्षाकृत पीछे चल रहे हैं, अपने कार्यों की समीक्षा करने और विभाग द्वारा जारी विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर तत्काल सुधार करने का आग्रह किया।
उन्होंने आगे बताया कि बेहतर निगरानी, प्रशासनिक दक्षता और सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से चलाए गए जन जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप, लगभग 90% से अधिक जिलों में पेंडेंसी दर 0.5% से भी कम रही है। परिवहन विभाग के अनुसार, जन सेवा केंद्रों (सीएससी) और सारथी पोर्टल के माध्यम से आने वाले समय में प्रदेश के हर जिले में ड्राइविंग लाइसेंस आवेदन और अनुमोदन प्रक्रिया में और भी अधिक सुधार होगा। विभाग द्वारा नियमित रूप से जिलों की प्रदर्शन समीक्षा जारी रहेगी, ताकि बेहतर परिणाम निरंतर सुनिश्चित किए जा सकें।
आयुक्त ने उन जिलों की सराहना की जिन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। गाजियाबाद का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कुल 24,115 आवेदनों में से केवल 15 आवेदन लंबित पाए गए, जो कुल का मात्र 0.06% है। इसी तरह, प्रयागराज (आरटीओ प्रयागराज) में कुल 23,914 आवेदनों में से केवल 33 आवेदन (0.13%) लंबित पाए गए। मुजफ्फरनगर में 13,523 आवेदनों में से केवल 20 आवेदन (0.15%) लंबित हैं। हालांकि, शाहजहांपुर और अमेठी जैसे जिलों में आवेदनों की कुल संख्या कम होने के बावजूद लंबित आवेदनों का प्रतिशत थोड़ा अधिक (क्रमशः 0.46% और 0.63%) पाया गया, जिस पर विभाग द्वारा तत्काल ध्यान देते हुए विशेष निगरानी शुरू की गई है।
कुल मिलाकर, परिवहन आयुक्त ने पेपरलेस, फेसलेस और कैशलेस अभियान को सफल बताते हुए ड्राइविंग लाइसेंस आवेदनों के त्वरित निस्तारण और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए विभाग की प्रतिबद्धता दोहराई।