मसाला फसलों पर किसानों को दिए गये वैज्ञानिक टिप्स
मसाला उत्पादन पर हुआ एक दिवसीय कृषक तकनीकी प्रशिक्षण का आयोजन
कानपुर, 08 मार्च । मसाला फसलों को लेकर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) कानपुर के वैज्ञानिक बराबर किसानों को तकनीक उपलब्ध करा रहे हैं। इसी कड़ी में रविवार को रसूलाबाद ब्लॉक में एक दिवसीय कृषक तकनीकी प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को मसाला फसलों को लेकर टिप्स दिये।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) कानपुर की सब्जी अनुभाग द्वारा ग्राम सिठउपुरवा, ब्लॉक रसूलाबाद में मसाला उत्पादन कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सब्जी अनुभाग में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजनांतर्गत कृषि मंत्रालय भारत सरकार के वित्तीय सहयोग से सुपारी और मसाला विकास निदेशालय कालीकट केरल द्वारा मसाला विकास योजना संचालित की जा रही है। जिसके अंतर्गत प्रजाति एवं तकनीक के हस्तांतरण हेतु इस गांव में लगभग 80 कृषकों को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें महिला एवं पुरुष कृषकों ने उत्साह पूर्वक प्रशिक्षण लिया।
कार्यक्रम के आरंभ में सब्जी विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉक्टर संजीव कुमार सिंह ने कृषकों का स्वागत करते हुए कहा कि इस समय मसाला बीज फसलो की किसान भाई कटाई कर रहे हैं। वह लोग ध्यान रखें कि धनिया की फसल पकने पर एक ही बार में उसकी कटाई नहीं करें, तेज धार के हंसिया से दो-तीन बार में पौधों की कटाई करके उसके बंडल बांध कर खलिहान में एकत्र करते जाएं। फसल के बहुत पकने का इंतजार नहीं करना चाहिए नहीं तो बीज उसी खेत में सूख कर गिरने की संभावना बढ़ जाती है। यदि धनिया का पाउडर बेचने के लिए आपने फसल ली है तो दाने का रंग हरा से बदलकर जैसे ही पीला होने लगे उससे पहले ही कटाई करने की उचित अवस्था है। इस समय काटी गई धनिया से तैयार पाउडर का रंग हल्का हरा होता है और खुशबू भी भरपूर होती है।
डॉ. आई एन शुक्ला ने धनिया, मेथी, सोया जैसी हरे पत्तेदार सब्जियों की वैज्ञानिक विधि से खेती करने की तकनीक बताई। क्योंकि रबी की फसल में ऐसी सब्जियां बाजार में उपलब्ध रहती हैं। डॉ आशुतोष उपाध्याय ने आलू की बुवाई से लेकर खुदाई तक सफलतापूर्वक कैसे अधिक आलू का उत्पादन लिया जाए बताया। इस मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र, दिलीप नगर के मृदा वैज्ञानिक डॉ खलील खान ने मसाला उत्पादन में मृदा स्वास्थ्य का महत्व के बारे में बताया। कार्यक्रम के अंत में डॉ संजीव कुमार सिंह ने कार्यक्रम में शामिल सभी कृषक भाइयों का धन्यवाद ज्ञापित किया।