दूल्हे की हत्या मामले में आरोपित की याचिका खारिज

-कोर्ट ने दो महीने में समर्पण कर जमानत लेने तक गिरफ्तारी पर लगाई रोक

दूल्हे की हत्या मामले में आरोपित की याचिका खारिज

 प्रयागराज, 18 जून । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जौनपुर जिले के भोले राजभर की याचिका खारिज करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इन्कार कर दिया है।न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। याची भोले राजभर के विरुद्ध 2 मई 2026 को थाना खेतासराय, जिला जौनपुर में धारा 103(1) बी एन एस के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई थी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है। वहीं, राज्य की ओर से लगाए गए आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया।दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पाया कि यह एफआईआर रद्द किए जाने योग्य मामला नहीं है और याचिका खारिज कर दी। हालांकि, याची को राहत देते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि वे आज से 60 दिनों के भीतर निचली अदालत में उपस्थित होकर नियमित जमानत या अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो उसे सुप्रीम कोर्ट के लाल कमलेंद्र प्रताप सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2009) मामले के निर्देशों के अनुसार विचार किया जाएगा।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 60 दिनों की इस अवधि में याची को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, बशर्ते वे पहले से गिरफ्तार न हों। लेकिन यदि वे निर्धारित समय में निचली अदालत में उपस्थित नहीं हुए, तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अदालत में समर्पण के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता के बेटे की शादी बिंद समाज की लड़की से तय थी। किंतु आजमगढ़ के उसके रिश्तेदार शादी के खिलाफ थे। जब बारात लेकर जा रहे थे तो मोटरसाइकिल पर आये अभियुक्तों ने कार में बैठे उसके बेटे दूल्हे आजाद की गोली मारकर हत्या कर दी। इस हत्याकांड में याची भी शामिल था।