Only registered lawyers can practice law: High Court

सिर्फ़ रजिस्टर्ड वकील ही कर सकते हैं वकालत : हाईकोर्ट

Only registered lawyers can practice law: High Court

प्रयागराज, 17 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने साफ़ तौर पर कहा कि कोई भी व्यक्ति, भले ही उसके पास पावर ऑफ अटॉर्नी हो, एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मुकदमे लड़ने वालों की तरफ़ से एक वकील या अटॉर्नी के तौर पर पेश होकर बहस नहीं कर सकता।

एडवोकेट्स एक्ट 1961 की धारा 29 और 33 का ज़िक्र करते हुए जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने साफ तौर पर कहा कि सिर्फ “रजिस्टर्ड वकील“ ही किसी दूसरे व्यक्ति की ओर से कोर्ट के सामने पेश होकर बहस कर सकते हैं।

बेंच ने आगे कहा कि हालांकि कोई भी व्यक्ति कोर्ट की मंज़ूरी से किसी सीमित मकसद के लिए किसी दूसरे व्यक्ति का केस पेश कर सकता है और बहस कर सकता है, लेकिन अधिकार के तौर पर ऐसा नहीं कर सकता।

इन टिप्पणियों के साथ बेंच ने एक याचिका खारिज की, जिसमें याचिकाकर्ता ने मुक़दमे लड़ने वालों की ओर से और उनकी तरफ़ से केस लड़ने और बहस करने की इजाज़त मांगी थी। जबकि वह न तो क़ानून का जानकार ग्रेजुएट था और न ही बार काउंसिल में रजिस्टर्ड था।

मामले के अनुसार याचिकाकर्ता विश्राम सिंह ने दावा किया कि वह अपने क्लाइंट्स की ओर से एक वकील के तौर पर ट्रायल कोर्ट में नियमित रूप से पेश होता रहा है।

हालांकि, 2019 में जब एक आरोपित ने एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज/स्मॉल कॉज़ेज कोर्ट, कानपुर नगर के सामने अर्ज़ी दायर की, जिसमें उसने याचिकाकर्ता को अपना वकील नियुक्त करने की मांग की ताकि वह उसका केस लड़ सके, तो उस अर्ज़ी को खारिज कर दिया गया। इसलिए याचिकाकर्ता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए मौजूदा याचिका के साथ हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।

याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह था कि वह अपने नाम पर लिखित पावर ऑफ़ अटॉर्नी हासिल करने के बाद उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में एक वकील के तौर पर रजिस्टर्ड हुए बिना भी मुक़दमे लड़ने वालों की ओर से और उनकी तरफ़ से एक ’मुख्तार’ और ’वकील’ के तौर पर पेश हो सकता है। अपने दावे को साबित करने के लिए, उन्होंने कई कानूनी प्रावधानों का सहारा लिया। जिनमें भारत के संविधान का अनुच्छेद 227(3) और अनुच्छेद 233(2), सामान्य सिविल नियम, 1957 का नियम 21, और साथ ही सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 2(15) (जिसे आदेश 3 नियम 4 के साथ पढ़ा जाए) शामिल था।