मुख्तार अंसारी गैंग का कुख्यात शूटर शाहरुख मुठभेड़ में ढेर
मुजफ्फरनगर में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई
मुजफ्फरनगर, 14 जुलाई: उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सोमवार, 14 जुलाई को एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। मुख्तार अंसारी गिरोह के एक कुख्यात और 50 हजार रुपये के इनामी शूटर शाहरुख पठान को यूपी एसटीएफ (विशेष कार्य बल) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया। शाहरुख, जो सिर्फ मुख्तार अंसारी गैंग तक ही सीमित नहीं था, बल्कि गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी जीवा गैंग के लिए भी सक्रिय रूप से काम करता था, उसकी मौत को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माफिया नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
मुठभेड़ का विवरण: यह मुठभेड़ मुजफ्फरनगर जिले के बिजोपुरा चौराहे के पास हुई। यूपी एसटीएफ की मेरठ इकाई को शाहरुख पठान की गतिविधियों के बारे में विशिष्ट खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद उसे ट्रैक किया गया। एसटीएफ और पुलिस टीम ने सटीक जानकारी के आधार पर शाहरुख की घेराबंदी की, जो उस समय एक कार में सवार होकर जा रहा था।
पुलिस और बदमाश के बीच फायरिंग: एसटीएफ के एएसपी बृजेश कुमार ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना के आधार पर जब एसटीएफ टीम ने कार सवार बदमाश शाहरुख पठान को रोकने की कोशिश की, तो उसने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बदमाश की तरफ से कई राउंड गोलियां चलाई गईं। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में आत्मरक्षा में फायरिंग की। पुलिस की गोली लगने से मुख्तार अंसारी का यह शूटर शाहरुख गंभीर रूप से घायल हो गया।
अस्पताल में हुई मौत: घायल अवस्था में शाहरुख को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शाहरुख मुजफ्फरनगर के खालापार का रहने वाला था और उस पर लंबे समय से पुलिस की नजर थी।
बरामदगी और अपराधिक इतिहास: मुठभेड़ स्थल से और शाहरुख के कब्जे से एक कार, तीन पिस्तौलें (जिनमें एक देशी पिस्तौल भी शामिल है) और 50 से अधिक जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। यह बरामदगी दर्शाती है कि वह किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने या पुलिस से सीधी टक्कर लेने की तैयारी में था। शाहरुख पठान का एक लंबा और संगीन आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ लूट, डकैती, हत्या और रंगदारी सहित कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे, जिसके कारण उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
इस कार्रवाई को यूपी एसटीएफ की अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे अपराधियों के बीच एक कड़ा संदेश गया है।