हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ाने के लिए किउल-झाझा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी

हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ाने के लिए किउल-झाझा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी

हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ाने के लिए किउल-झाझा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी

नई दिल्ली, 19 मई । भारतीय रेलवे ने हावड़ा-दिल्ली रेल मार्ग पर क्षमता विस्तार और परिचालन दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से 54 किलोमीटर लंबी किउल-झाझा तीसरी रेल लाइन परियोजना को 962 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। यह भारतीय रेलवे के अति व्यस्त यातायात वाले नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे पूर्वी तथा उत्तरी भारत में यात्री एवं माल परिवहन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि किउल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी तथा ट्रेनों की समयपालन क्षमता और परिचालन लचीलेपन में सुधार लाएगी। अतिरिक्त रेल लाइन से यात्री और मालगाड़ियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास तथा व्यापार संपर्क को भी बढ़ावा मिलेगा।

रेल मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में किउल और झाझा के बीच मौजूदा दोहरी रेल लाइन अपनी आदर्श क्षमता से अधिक दबाव में संचालित हो रही है। आने वाले वर्षों में इस मार्ग पर यातायात और बढ़ने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त अवसंरचना की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

प्रस्तावित तीसरी लाइन परियोजना से लाइन क्षमता में वृद्धि होगी, भीड़भाड़ कम होगी और यात्री तथा मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुगम बन सकेगी। इससे पटना और कोलकाता के बीच संपर्क बेहतर होगा, साथ ही उत्तरी और पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक केंद्रों से जुड़ी माल ढुलाई को भी मजबूती मिलेगी।

यह रेलखंड कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों को रक्सौल तथा नेपाल से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा बरह एसटीपीपी, जवाहर एसटीपीपी और बीरगंज आईसीडी जैसे प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़े भारी माल यातायात का संचालन भी इसी मार्ग से होता है।

रेलवे के अनुसार इस रणनीतिक कॉरिडोर पर बढ़ती यातायात मांग को देखते हुए यह परियोजना दीर्घकालिक आधारभूत संरचना समर्थन प्रदान करेगी। अतिरिक्त वहन क्षमता और बेहतर संपर्क से लॉजिस्टिक्स संचालन अधिक कुशल होगा, भीड़भाड़ कम होगी और पूर्वी एवं उत्तरी भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच रेल परिवहन अधिक विश्वसनीय बन सकेगा।