प्रमुख सचिव गृह व डी जी पी को निर्देश
पुलिस प्रशिक्षण का तंत्र बनाये ताकि कानून का न करें हनन
प्रयागराज, 25 मार्च । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने झूठा वायदा कर सेक्स संबंध बनाने के बाद शादी से इंकार मामले में बरेली की सी बी गंज थाना पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने व लचर विवेचना करने को गंभीरता से लिया है। एस एस पी बरेली को पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही प्रदेश के डी जी पी व प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिया है कि ऐसा तंत्र विकसित करें जिससे थाना पुलिस को कानून की बेहतर जानकारी दिलाई जाय।और लापरवाह पुलिस के खिलाफ उचित कदम उठाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने शिवम सिंह की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याची ने अपने खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में गाली-गलौज व दहेज उत्पीड़न केस कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।
कोर्ट ने कहा पीड़िता के कथन से अपराध का खुलासा होता था, किन्तु दर्ज एफआईआर भिन्न है। याची का दावा था कि दर्ज एफआईआर से किसी अपराध का खुलासा नहीं होता। इसके खिलाफ झूठा केस चलाया जा रहा है। जबकि पीड़िता का आरोप है कि शादी का झूठा वायदा किया और शारीरिक संबंध बनाये, शादी से इंकार कर दिया, फिर सरकारी नौकरी का लालच देकर संबंध बनाता रहा। एक स्टैम्प पर 3 जून 23 को शादी भी की किंतु वह पत्रावली पर नहीं है। कोर्ट ने पीड़िता को भी अगली तिथि पर हाजिर होने को कहा है।
कोर्ट ने पुलिस के रवैए की तीखी आलोचना की है। कहा दुष्कर्म का आरोप है किन्तु एफआईआर में जिक्र नहीं। पुलिस कार्रवाई पर संदेह खड़ा करती है। पुलिस ने लापरवाही से कानून के खिलाफ काम किया। अपराध की सही विवेचना नहीं की। कोर्ट ने न्यायहित में डी जी पी, प्रमुख सचिव गृह व एस एस पी बरेली को निर्देश जारी किए हैं। याचिका की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।