दुनिया में सबसे सस्ती रसोई गैस पाने वाले देशों में भारत, उज्ज्वला लाभार्थियों को 642 रुपये में मिल रहा सिलेंडर: केंद्र

दुनिया में सबसे सस्ती रसोई गैस पाने वाले देशों में भारत, उज्ज्वला लाभार्थियों को 642 रुपये में मिल रहा सिलेंडर: केंद्र

दुनिया में सबसे सस्ती रसोई गैस पाने वाले देशों में भारत, उज्ज्वला लाभार्थियों को 642 रुपये में मिल रहा सिलेंडर: केंद्र

नई दिल्ली, 07 जून। भारतीय दुनिया में सबसे कम कीमत पर रसोई गैस प्राप्त करने वालों में शामिल हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम का एलपीजी सिलेंडर प्रभावी रूप से 642 रुपये में मिल रहा है। दिल्ली में सामान्य उपभोक्ता 942 रुपये में सिलेंडर खरीद रहे हैं, जबकि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में एक सिलेंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक हो चुकी है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने रविवार को कहा कि उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) सहायता पहले चार रिफिल पर दी जाती है। इस प्रकार उन्हें सालाना 1,200 रुपये की सहायता मिलती है। गैर-उज्ज्वला उपभोक्ता भी बाजार आधारित लागत की तुलना में लगभग 700 रुपये कम कीमत पर सिलेंडर प्राप्त कर रहे हैं।

मंत्रालय ने बताया कि भारत में उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए प्रभावी एलपीजी कीमत 642 रुपये है, जबकि पाकिस्तान में समान मात्रा का सिलेंडर 1,046 रुपये, नेपाल में 1,207 रुपये, बांग्लादेश में लगभग 1,225 रुपये और श्रीलंका में 1,241 रुपये का है। वहीं, अमेरिका में इसकी कीमत लगभग 1,755 रुपये, ऑस्ट्रेलिया में 1,765 रुपये और कनाडा में 2,411 रुपये के बराबर है।

मंत्रालय के अनुसार, भारत अपनी एलपीजी आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में तय होने वाले सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (सीपी) से प्रभावित होती है। फरवरी में एलपीजी का सऊदी सीपी 542.50 डॉलर प्रति टन था, जो जून 2026 तक बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। इस अवधि में इसमें लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखा। देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं हुई और एलपीजी की बॉटलिंग तथा वितरण सामान्य रूप से जारी रहा।

घरेलू एलपीजी की बढ़ती लागत का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां और केंद्र सरकार लागत तथा खुदरा मूल्य के बीच अंतर को वहन कर रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक घरेलू एलपीजी पर संचयी अंडर-रिकवरी लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि एक वर्ष पहले यह 41,338 करोड़ रुपये थी। इस मद में केंद्र सरकार ने तेल विपणन कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति को मंजूरी दी है।

मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत अब तक 10.58 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं।