भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में राष्ट्रीय एकता पर जोर : डा. किस्मत कुमार

भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में राष्ट्रीय एकता पर जोर : डा. किस्मत कुमार

भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में राष्ट्रीय एकता पर जोर : डा. किस्मत कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिमाचल उत्तर क्षेत्र के सह क्षेत्र कार्यवाह डा. किस्मत कुमार ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक बेंगलुरू में आयोजित की गई। इस बैठक में आरआरएस की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर संगठनात्मक विस्तार, सामाजिक सेवा, राष्ट्रीय एकता और हिंदू समाज की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा इस दौरान भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने पर भी बल दिया गया। बुधवार को धर्मशाला में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए डॉ किस्मत कुमार ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत सहित अन्य पदाधिकारी और 1,443 कार्यकर्ता बैठक में शामिल हुए।

उन्होंने बताया कि प्रतिनिधि सभा में संघ के 100वें वर्ष में संगठन के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने संगठनात्मक विस्तार की जानकारी देते हुए कहा कि संघ की शाखाओं में वृद्धि हो रही है। प्रतिदिन 83,129 शाखाएं 51,570 स्थानों पर लगती हैं, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 10,000 अधिक है। साप्ताहिक मिलन 32,147, मासिक मंडली 12,091, जबकि कुल (शाखा-मिलन-मंडली) 1,27,367 हैं। पिछले वर्ष की तुलना में 3,050 की वृद्धि हुई है। इनमें युवाओं की भागीदारी ज्यादा रही है। उन्होंने कहा कि 14-25 आयु वर्ग के युवा बड़ी संख्या में संघ से जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2,453 स्वयंसेवकों ने दो वर्षों तक पूर्णकालिक सेवा के लिए समर्पण किया।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश में संगठनात्मक स्थिति को लेकर बताया कि हिमाचल में कुल जिले 26 हैं, कुल स्थान 737, कुल शाखाएं 1004, साप्ताहिक मिलन 327 और संघ मंडली 156 हैं। उन्होंने सामाजिक समरसता के प्रयास पर प्रतिनिधि सभा में की गई बैठक का ब्यौरा देते हुए बताया कि 1,084 स्थानों पर मंदिर प्रवेश प्रतिबंध और जल स्रोत भेदभाव जैसी गलत प्रथाओं को समाप्त करने के प्रयास हुए हैं। इसके अलावा 260 से अधिक स्थानों पर सफाई कर्मचारियों के लिए भोजन, चिकित्सा जांच और स्वच्छता उपकरण उपलब्ध कराना। उन्होंने महाकुंभ प्रयागराज और पर्यावरणीय पहल पर भी जानकारी साझा की।

उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों पर संघ की प्रतिक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि मणिपुर हिंसा में हिंसाग्रस्त लोगों के लिए राहत शिविर और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की गई। संघ सामाजिक और सामुदायिक नेताओं के माध्यम से हल करने में विश्वास करता है। भाषा विवाद पर उन्होंने कहा कि संघ मातृभाषा को प्राथमिकता देने का पक्षधर रहा है।

उन्होंने बताया कि बैठक में बांग्लादेश के हिंदू समाज के साथ एकजुटता से खड़े रहने का आह्वान किया गया। प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित प्रस्ताव में बांग्लादेश के हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे निरंतर अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। इस्लामी कट्टरपंथी तत्वों द्वारा मंदिरों और धार्मिक स्थलों की तोड़फोड़, महिलाओं पर अत्याचार, जबरन मतांतरण और संपत्ति लूट जैसे कृत्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में हिंदुओं की जनसंख्या 1951 में 22 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 7.95 प्रतिशत रह गई है, जिससे उनके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। भारत-विरोधी बयानबाजी और कट्टरपंथी तत्वों को संस्थागत समर्थन मिलने से स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। ऐसे में भारत के नागरिकों, नीति-निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहकर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है । बांग्लादेशी हिंदू समाज ने लोकतांत्रिक तरीकों से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी समर्थन मिल रहा है। प्रतिनिधि सभा ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वह बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी इस पर कठोर कदम उठाने चाहिए।

वहीं इस मौके पर डॉ. वीर सिंह रांगड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी के अवसर पर यह आवश्यक है कि हम हिंदू समाज की संगठित और समरस संरचना को सशक्त बनाने का संकल्प लें। संघ ने पिछले 100 वर्षों में व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। यह प्रयास समाज में प्रेम, आत्मीयता और सेवा की भावना को केंद्र में रखकर विभाजनकारी तत्वों से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है। आज भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे में पर्यावरण-संरक्षण, परिवार मूल्यों की रक्षा, नागरिक कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता और आत्मबोध से युक्त समाज का निर्माण आवश्यक है।