सावन माह की भक्तिमय यात्रा: प्रयागराज-वाराणसी राजमार्ग पर उमड़ा आस्था का सैलाब
सावन माह की भक्तिमय यात्रा: प्रयागराज-वाराणसी राजमार्ग पर उमड़ा आस्था का सैलाब
सावन माह की पावन बेला में, प्रयागराज और वाराणसी को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग इन दिनों आस्था और भक्ति के एक अद्भुत रंग में रंगा हुआ है। चारों ओर भगवा ध्वज और रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजे कांवड़ियों का सैलाब उमड़ा हुआ है, जिससे यह मार्ग एक जीवंत तीर्थ पथ में तब्दील हो गया है।
प्रयागराज के पावन संगम तट से गंगा जल लेकर, हजारों शिवभक्त दुर्गम 125 किलोमीटर की पदयात्रा नंगे पांव तय कर रहे हैं, ताकि वे बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पहुँच कर महादेव का जलाभिषेक कर सकें। इस कष्टसाध्य यात्रा के बावजूद, इन कांवड़ियों का उत्साह, ऊर्जा और बाबा भोलेनाथ के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा अपने चरम पर है। रास्ते भर नाचते-गाते, ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते हुए ये श्रद्धालु, अपनी भक्ति का अनूठा प्रदर्शन कर रहे हैं।
लंबी दूरी की थकान को दूर करने और निरंतर ऊर्जा बनाए रखने के लिए, ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ का गगनभेदी उद्घोष वातावरण में गूँज रहा है। यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि उनके भीतर शिव भक्ति की एक अग्नि है जो उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है और नए उत्साह का संचार कर रही है।
हालांकि, लगातार पैदल चलने से कई कांवड़ियों के पैरों में छाले पड़ गए हैं और घाव भी हो गए हैं, जो उनकी इस कठिन यात्रा की निशानी हैं। इन्हीं दर्द को कम करने और उन्हें संबल प्रदान करने के उद्देश्य से, राजमार्ग के किनारे विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने निःस्वार्थ भाव से सेवा शिविर स्थापित किए हैं।
इन शिविरों में समर्पित कार्यकर्ता पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ कांवड़ियों की सेवा में जुटे हुए हैं। वे उनके थके हुए पैरों को गर्म पानी से धोकर, छालों और घावों पर मरहम-पट्टी कर रहे हैं, जिससे उन्हें तत्काल राहत मिल रही है। इसके साथ ही, वे उन्हें चाय, नाश्ता, फल और पीने का पानी जैसी आवश्यक चीजें भी उपलब्ध करा रहे हैं। इन सेवा शिविरों का माहौल भी अत्यंत भक्तिमय और उत्साहपूर्ण है, जहां डीजे की धुन पर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारे लगाते हुए आ रहे कांवड़ियों का स्थानीय लोग और शिविर के स्वयंसेवक गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं, उन्हें गले लगाकर या हाथ जोड़कर उनकी यात्रा को सफल बनाने की कामना कर रहे हैं।
इसी कड़ी में, मोहनसराय के समीप स्थापित मानवाधिकार तथा रश्मि जन कल्याण समिति के सेवा शिविर में मंगलवार को पहुंचे कांवड़ियों का विशेष स्वागत किया गया। शिविर के मुख्य आयोजक संजय यादव ने अपनी पूरी टीम के साथ मिलकर, इन थके हुए शिवभक्तों को फल, बिस्किट, स्वच्छ पानी और गर्म चाय आदि भेंट की। इसके उपरांत, समिति के समर्पित डॉ. राजेश पटेल और अन्य कार्यकर्ताओं ने मिलकर अत्यंत सावधानी और सेवाभाव के साथ कांवड़ियों के पैरों को गुनगुने पानी से धोया और उनके छालों तथा घावों पर औषधीय मरहम लगाकर पट्टी की, जिससे उन्हें बहुत सुकून मिला।
इस सेवा के बाद, जब ये कांवड़िये शहर की ओर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की अपनी अंतिम यात्रा के लिए निकले, तो मोहनसराय चौकी इंचार्ज ने अपनी पुलिस टीम के साथ मिलकर उन्हें विशेष रूप से तैयार किए गए 'कांवड़िया पथ द्वार' से रवाना किया। यह द्वार मोहनसराय से चांदपुर जाने वाली जीटी रोड पर कांवड़ियों के लिए आरक्षित लेन में बनाया गया है, ताकि वे सुरक्षित और निर्बाध रूप से आगे बढ़ सकें।
यह उल्लेखनीय है कि पवित्र सावन माह को देखते हुए, प्रशासनिक स्तर पर प्रयागराज और काशी विश्वनाथ धाम के बीच कांवड़ियों की सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर उनके लिए एक अलग, आरक्षित लेन बनाई गई है और पूरे मार्ग पर सुरक्षा के अत्यंत कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि लाखों शिवभक्त अपनी यह आध्यात्मिक यात्रा बिना किसी बाधा के पूर्ण कर सकें।