बिहार विधानसभा चुनाव : ‘संकल्प’ बनाम ‘प्रण’, कौन गढ़ेगा बिहार के लोगों का भविष्य
बिहार विधानसभा चुनाव : ‘संकल्प’ बनाम ‘प्रण’, कौन गढ़ेगा बिहार के लोगों का भविष्य
बिहार विधानसभा (विस) चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्षी महागठबंधन ने अपना चुनावी पिटारा खोल दिया है। अब प्रदेश की जनता को किसका पिटारा कितना पसंद आता है, यह गठबंधन दलों के पक्ष में होने वाला मतदान तय करेगा। राजग और महागठबंधन दोनों के संकल्प पत्रों का तुलनात्मक अध्ययन प्रदेश की जनता राजनीतिक दलों के आधार पर करेगी क्योंकि ये दोनों मजबूत गठबंधन हैं। दोनों के संकल्प पत्रों की तुलना करने के लिए जनता को उनके घोषणापत्रों को बरीकी से देखना होगा और फिर उनके प्रमुख बिंदुओं, जैसे अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित वादों की तुलना समझदारी से करनी होगी।
बिहार में दो बड़े राजनीतिक दलों के समूह ने अपने-अपने संपल्प पत्र (घोषणा पत्र) जारी कर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की है। एक तरफ सत्ताधारी राजग का ‘संकल्प पत्र’, बड़े पैमाने पर रोजगार और विकास का सपना बुनता है तो विपक्षी महागठबंधन का ‘प्रण पत्र’, युवाओं और महिलाओं को आर्थिक लाभ का वादा करता है। लेकिन क्या ये वादे सिर्फ चुनावी हैं या बिहार के 13 करोड़ लोगों के लिए सच्ची दिशा? इस पर बिहारवासियों को गहराई से सोचना होगा।
बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। महागठबंधन ने 27 अक्टूबर को पटना में ‘प्रण पत्र’ जारी किया। मुख्य वादों में हर परिवार को एक सरकारी नौकरी, महिलाओं को प्रति माह 2,500 रुपये की सहायता, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, 500 रुपये में गैस सिलिंडर, 25 लाख तक मुफ्त इलाज और पुरानी पेंशन योजना की बहाली शामिल है।
राजग ने इसे तुरंत ‘असंभव सपने’ करार देते हुए 31 अक्टूबर को पटना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अगुवाई में ‘संकल्प पत्र’ पेश किया। यह घोषणा पत्र ‘विकसित बिहार’ के विजन पर आधारित है, जिसमें 1 करोड़ सरकारी नौकरियां, 1 करोड़ ‘लखपति दीदियां’ (महिलाओं को 2 लाख रुपये की सहायता), हर फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी, 125 यूनिट मुफ्त बिजली, और बड़े आधारभूत संरचनाओं से संबंधित परियोजनाएं (इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स) जैसे एक्सप्रेस-वे और मेट्रो का विस्तार शामिल है। नीतीश कुमार और चिराग पासवान जैसे सहयोगियों के बीच एकजुटता दिखाते हुए राजग ने इसे ‘सुशासन का संकल्प’ बताया, जो पिछले 20 सालों के विकास को आगे बढ़ाएगा।
राजग के घोषणापत्र में एक करोड़ से ज्यादा सरकारी नौकरी का वादा है। हर जिले में मेगा स्किल सेंटर बनाने का भी वादा किया गया है। राजग ने एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है। किसान सम्मान निधि को 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार करने का वादा किया गया है। बिहार के किसानों को सभी फसलों पर एमएसपी की गारंटी का वादा भी दिया है। ईबीसी वर्ग के लोगों को 10 लाख तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। स्कूलों में मिड डे मील में पौष्टिक नाश्ता बच्चों को देने का वादा भी किया गया है। बिहार में राजग की वापसी हुई तो 50 लाख नए पक्के मकान, मुफ्त राशन, 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का भी वादा किया गया है। बिहार के 4 नए शहरों को मेट्रो की सौगात को भी वादा दिया गया है। पटना, दरभंगा, पूर्णिया, भागलपुर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों की शुरुआत की जाएगी।
घोषणापत्रों के विश्लेषण की बात करें तो ‘प्रण पत्र’ बिहार की पिछड़ी जातियों, दलितों और मुसलमानों को लक्षित करता है, जो उसका वोटबैंक माना जाता है। दूसरी ओर, राजग का ‘संकल्प’ डबल इंजन सरकार के फायदों को गिनाते हुए मोदी-नीतीश के राष्ट्रीय ब्रांड पर टिका है। राजग नेताओं ने ‘प्रण पत्र’ को ‘असंभव’ ठहराया, दावा किया कि महागठबंधन के पास फंडिंग का इंतजाम नहीं।
चुनाव के पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर से शुरू हो रही है और ये घोषणा पत्र मतदाताओं का विश्वास जीतने का आखिरी मौका है। सुशासन, बेरोजगारी (40 प्रतिशत युवा प्रभावित) और महंगाई मुख्य मुद्दे हैं। जनता के सामने दोनों पक्ष के दावेदारों के मजबूत चुनावी वादे और दावे हैं। अब बिहार के मतदाता तय करेंगे कि किसके वादों और काम पर उसका कितना विश्वास और भरोसा है।