जीएसटी मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का आदेश

-जीएसटी में भदोही के अनिल आर्ट एंड क्राॅफ्ट तथा पूनम क्रिएशन को राहत-अनुचित तरीके से जीएसटी पंजीकरण रद्द करने के आ रहे मामले में हाईकोर्ट ने जाहिर की चिंता -कमिश्नर वाणिज्य कर उत्तर प्रदेश को सर्कुलर निर्गत करने का निर्देश

जीएसटी मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का आदेश

प्रयागराज, 25 नवम्बर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संत रविदास नगर (भदोही) के कालीन कारोबारी एवं निर्यातक द्वारा जीएसटी चोरी मामले में दाखिल स्पष्टीकरण़ की बिना युक्तियुक्त जांच पड़ताल किए सहायक आयुक्त द्वारा एकतरफा आईटीसी ब्लॉक कर पंजीकरण रद्द करने और डीजीजीआई (डायरेक्टोरेट जनरल आफ जीएसटी इंटेलिजेंस) द्वारा सम्मन एवं जबरन वसूली के मामले में अनिल आर्ट एंड क्राफ्ट तथा पूनम क्रिएशन्स को बड़ी राहत दी है।

न्यायालय ने मामलों में सहायक आयुक्त द्वारा पारित आदेशों को रद्द करते हुए वाणिज्य कर आयुक्त को 15 दिनों में परिपत्र जारी करने का बिंदुवार निर्देश दिया। यह आदेश याचियों द्वारा दायर विभिन्न याचिकाओं में जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह एवं जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खण्डपीठ ने अधिवक्ता प्रांजल शुक्ला को सुनकर दिया है।

याचिका स्वीकार करते हुए पीठ ने चिंता जताई कि यदि जीएसटी प्राधिकारी बिना कारोबारी का पक्ष जाने एकतरफा जीएसटी पंजीकरण रद्द कर देंगे तो इनवॉइस एवं आईटीसी के अभाव में कारोबार समाप्त हो जाएगा। न्यायालय ने मामलों में सहायक आयुक्त द्वारा पारित आदेशों के रद्द करते हुए वाणिज्य कर आयुक्त को 15 दिनों में परिपत्र जारी करने का बिंदुवार निर्देश दिया।मामले में कारोबारी को बिना मांग जारी किए, डीजीजीआई (डायरेक्टर जनरल जीएसटी इंटेलिजेंस) द्वारा बड़ी धनराशि वसूली गई थी। सकारण आदेश दिए बिना सहायक आयुक्त जीएसटी भदोही ने कारोबारी का जीएसटी पंजीकरण खारिज कर आईटीसी ब्लॉक कर दिया था। डीजीजीआई द्वारा पक्षकारों से दस्तावेज मंगाकर युक्तियुक्त विवेचना का आदेश पारित किया जाय। कोर्ट ने कहा कि मामले में जब तक व्यक्तिगत उपस्थिति अपरिहार्य न हो अकारण सम्मन करने से बचा जाए। याचियों द्वारा दाखिल अन्य याचिका में फैसला करते हुए पीठ ने विभाग द्वारा नियम विरुद्ध जबरन वसूली पर रोक लगा दी है।नियंत्रक एवं महालेखाकार भारत सरकार की प्रदेश ऑडिट एडवाइजरी बोर्ड के जीएसटी विशेषज्ञ सदस्य डॉ. पवन जायसवाल ने बताया कि “जीएसटी चोरी के मामलों की पड़ताल के सम्बंध में नियम एवं केन्द्र सरकार की गाइडलाइन सुस्पष्ट है। हितधारक जीएसटी नियमों की अनदेखी न करें ताकि अनुचित उत्पीड़न और सरकार को कर का नुकसान न हो।याचिकाकर्ताओं का पक्ष अधिवक्ता प्रांजल शुक्ला ने जबकि डीजीजीआई की तरफ से सरकारी अधिवक्ता धनंजय अवस्थी एवं राज्य जीएसटी की तरफ से राज्य विधि अधिकारी अरविंद मिश्रा, पर्व अग्रवाल ने पक्ष रखा।