बिना मान्यता के संचालित शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरों पर होगी कार्रवाई : माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव
बिना मान्यता के संचालित शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरों पर होगी कार्रवाई : माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव
प्रयागराज, 07 अप्रैल । उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ओर जहां बिना मान्यता संचालित विद्यालयों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्तियों के विकास और संरक्षण के लिए नई योजना लागू करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी मंगलवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि शासन से जारी निर्देशों के अनुसार, उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम 2002 के तहत बिना मान्यता संचालित शिक्षण संस्थानों और कोचिंग सेंटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मान्यता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक निजी कोचिंग में पढ़ाते पाए जाने पर उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस संबंध में न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में सभी जिलों में अभियान चलाकर अवैध रूप से संचालित विद्यालयों की पहचान की जाएगी। इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जिसमें शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी भी शामिल रहेंगे। यह समिति जांच कर दोषी संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई करेगी। अभियान 6 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक चलाया जाएगा तथा 30 अप्रैल तक कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध करानी होगी।
योगी सरकार ने शुरू की डॉ. बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना
सचिव ने बताया कि दूसरी ओर, प्रदेश सरकार ने डॉ. बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत राज्य में स्थापित अंबेडकर प्रतिमाओं के आसपास के क्षेत्रों का विकास, सौंदर्यीकरण और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। प्रतिमा स्थलों पर बाउंड्रीवाल, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
योजना के अंतर्गत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10 स्मारकों का विकास किया जाएगा। प्रति स्मारक 10 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इस प्रकार प्रदेश की 403 विधानसभाओं में कुल 4030 स्मारकों के विकास पर लगभग 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है।
सरकार का उद्देश्य एक ओर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर महापुरुषों की विरासत को संरक्षित कर उन्हें सम्मानजनक स्वरूप प्रदान करना भी है।