झूंसी के हरिश्चंद्र शोध संस्थान में तेंदुआ घुसने से हड़कंप, दहशत का माहौल, वन विभाग का सर्च ऑपरेशन शुरू

झूंसी के हरिश्चंद्र शोध संस्थान में तेंदुआ घुसने से हड़कंप, दहशत का माहौल, वन विभाग का सर्च ऑपरेशन शुरू

झूंसी के हरिश्चंद्र शोध संस्थान में तेंदुआ घुसने से हड़कंप, दहशत का माहौल, वन विभाग का सर्च ऑपरेशन शुरू

प्रयागराज में शनिवार की शाम उस समय हड़कंप मच गया जब झूंसी के प्रतिष्ठित हरिश्चंद्र शोध संस्थान (HRI) परिसर में एक तेंदुआ दिखाई दिया। संस्थान के छतनाग वार्ड स्थित परिसर में वॉच टावर नंबर एक पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने सबसे पहले इस खतरनाक जानवर को देखा। कुछ ही देर में, वॉच टावर नंबर तीन और पाँच के पास भी इसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई।

पिछले दो महीनों से गंगापार के हनुमानगंज इलाके में आतंक मचा रहे इस तेंदुए के संस्थान परिसर में प्रवेश से कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और आसपास के निवासियों में गंभीर चिंता की लहर दौड़ गई है।

घटनाक्रम और वन विभाग की कार्रवाई

  • सुरक्षाकर्मियों की सूचना: वॉच टावर नंबर एक पर तैनात श्री हरिमोहन शुक्ला और विजयशंकर तिवारी ने तुरंत कंट्रोल रूम को सूचना दी।

  • तेंदुए का विचरण: सूचना मिलते ही अन्य सुरक्षाकर्मी सतर्क हुए, लेकिन तेंदुआ परिसर के लगभग ढाई सौ बीघे में फैले घने जंगल वाले हिस्से में घुस गया।

  • तत्काल सर्च ऑपरेशन: घटना की गंभीरता को देखते हुए, उप वन क्षेत्राधिकारी श्री सत्येंद्र चौधरी अपनी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और रात के अंधेरे में ही तेंदुए की तलाश शुरू की।

  • बाधा और असफलता: रात के सन्नाटे और विशाल जंगल क्षेत्र के कारण घना अंधेरा सर्च ऑपरेशन में सबसे बड़ी बाधा बना। देर रात तक चले व्यापक तलाशी अभियान के बावजूद, वन कर्मियों को तेंदुआ पकड़ने में सफलता नहीं मिल सकी।

आगामी योजना और व्यापक चिंता

वन क्षेत्राधिकारी श्री लक्ष्मीकांत दुबे और श्री सत्येंद्र चौधरी ने बताया कि रात के कारण व्यापक तलाशी संभव नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले दिन सुबह पूरी तैयारी, अतिरिक्त संसाधनों और विशेषज्ञ टीमों के साथ तेंदुए को पकड़ने का काम फिर से शुरू किया जाएगा।

यह घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यह वही तेंदुआ माना जा रहा है जिसने पूर्व में कुछ ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें घायल किया है। इसे अब "आदमखोर तेंदुआ" माना जा रहा है।

खतरा घनी आबादी पर:

हरिश्चंद्र शोध संस्थान परिसर के ठीक बगल में बिड़ला गेस्ट हाउस, एमपी बिड़ला शिक्षा भवन एवं इंटर कॉलेज, और सदाफलदेव आश्रम जैसे महत्वपूर्ण संस्थान हैं। इसके अलावा, आस-पास छतनाग गांव, देवनगर कॉलोनी, मायापुरी कॉलोनी, आवास विकास कॉलोनी योजना तीन जैसी घनी आबादी वाली बस्तियाँ हैं, जहाँ हजारों की संख्या में लोग निवास करते हैं।

संस्थान परिसर से निकलकर घनी आबादी में आदमखोर तेंदुए के प्रवेश की आशंका से पूरे क्षेत्र के जनजीवन पर गहरा असर पड़ा है। लोगों ने अनहोनी की आशंका से रात भर घरों में सहमे हुए और सतर्कता बरतते हुए गुजारा है।


पाठकों के लिए सुरक्षा निर्देश:

  • कृपया अनावश्यक रूप से अंधेरे में घर से बाहर न निकलें।

  • अपने पालतू जानवरों को सुरक्षित स्थान पर रखें।

  • किसी भी संदिग्ध हलचल की सूचना तुरंत वन विभाग या स्थानीय पुलिस को दें।

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