यूपी में 19 नवंबर से शुरू होगा फाइलेरिया उन्मूलन अभियान, 16 जिलों में घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य टीम
7 दिसंबर तक चलेगा सर्वजन दवा सेवन अभियान, पहली बार दवा लेने वालों और पहले छूट चुके लोगों पर रहेगा विशेष फोकस
लखनऊ, 22 अक्टूबर । प्रदेश को फाइलेरिया मुक्त बनाने के मद्देनजर अब फोकस उन लोगों पर है, जो अब तक सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान से दूर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की रणनीति में इस बार ‘नेवर टेकन’ (कभी न दवा खाने वाले) श्रेणी के लोगों की पहचान और उन्हें फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने पर विशेष जोर है। राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. एके चौधरी के अनुसार उत्तर प्रदेश में एमडीए अभियान 19 नवंबर से 7 दिसंबर के बीच चलाया जायेगा।
घर-घर पहुंचकर खोजे जा रहे दवा से दूर रहे लोग
प्रदेश के 16 जिलों के 53 प्लानिंग यूनिट (पीयू) में एमडीए अभियान 19 नवंबर से 7 दिसंबर के बीच आयोजित होगा। जमीनी स्तर पर फाइलेरिया उन्मूलन की सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जो जागरूकता की कमी, दवा को लेकर आशंका या गलत धारणाओं के कारण अब तक दवा नहीं ले पाए हैं। कुछ लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि फाइलेरिया जैसी बीमारी लंबे समय में गंभीर शारीरिक परेशानी और दिव्यांगता का कारण बन सकती है।
ऐसे में आशा कार्यकर्ताओं और अन्य अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका अहम हो जाती है। घर-घर संपर्क के दौरान परिवारों से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्होंने पहले फाइलेरिया रोधी दवा ली है या नहीं। इससे उन पात्र लोगों को चिह्नित करने में मदद मिल रही है, जो पिछले अभियानों में लगातार छूटते रहे हैं।
‘नेवर टेकन’ लोगों का चिन्हीकरण व दवा सेवन जरूरी
राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. एके चौधरी के अनुसार एमडीए अभियान की तैयारी पूरी कर ली गई है। सभी 16 जिलों में दवा पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि इस बार प्रत्येक प्लानिंग यूनिट में 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को अपने सामने दवा खिलाने का लक्ष्य है। इसमें ‘नेवर टेकन’ और इनकार करने वाले लोगों की पहचान, उनकी पात्रता के अनुरूप दवा सेवन, छूटे लोगों का फॉलोअप और समुदाय की भागीदारी पर ध्यान देना आवश्यक है।
इन जिलों में होना है एमडीए
कानपुर नगर, उन्नाव, कानपुर देहात, चित्रकूट, सीतापुर, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, प्रयागराज, गोण्डा, हरदोई, कन्नौज, बलिया, फर्रुखाबाद, फतेहपुर व कौशांबी के 53 प्लानिंग यूनिट (पीयू) में एमडीए अभियान होना है। सबसे ज्यादा फतेहपुर में 11 पीयू, उसके बाद सीतापुर में 10 व कानपुर देहात में सात पीयू हैं।