भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत चंद्र-त्रिशूल और मुण्डमाल से हुआ दिव्य शृंगार

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर तड़के चार बजे खुले महाकाल मंदिर के कपाट। पंचामृत अभिषेक के बाद ड्रायफ्रूट, रजत आभूषण, रुद्राक्ष और पुष्पों से हुआ विशेष श्रृंगार, जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर।

भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत चंद्र-त्रिशूल और मुण्डमाल से हुआ दिव्य शृंगार


उज्जैन, 15 सितंबर । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर भगवान महाकाल की भस्म आरती विशेष शृंगार के साथ संपन्न हुई।

सुबह करीब चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का हरिओम जल से अभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से पूजन-अभिषेक किया गया।

इसके बाद बाबा महाकाल का भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से दिव्य शृंगार किया गया। भगवान को रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुंड धारण कराया गया। ड्रायफ्रूट से किए गए विशेष शृंगार में बाबा महाकाल को राजा स्वरूप प्रदान किया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाओं से भगवान का अलंकरण किया गया। फल और मिष्ठान का भोग भी अर्पित किया गया।

मंत्रोच्चार के बीच भस्म अर्पित

भस्म आरती की प्रक्रिया के तहत प्रथम घंटाल बजाया गया और भगवान महाकाल को हरिओम जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार और पूजन के बाद कपूर आरती हुई। इसके पश्चात ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान झांझ, मंजीरे और डमरू की ध्वनि से मंदिर परिसर गूंज उठा।

नंदी के दर्शन कर मांगा आशीर्वाद

भस्म आरती से पहले नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कही। इस दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा।