भक्तों के भाव के भूखे होते हैं भगवान : पूज्य सत्यानंद जी महाराज

भक्तों के भाव के भूखे होते हैं भगवान : पूज्य सत्यानंद जी महाराज

भक्तों के भाव के भूखे होते हैं भगवान : पूज्य सत्यानंद जी महाराज

प्रयागराज, 16 अगस्त । भगवान शिव को पाने के लिए सच्चे भाव और भक्ति की आवश्यकता है। भगवान केवल भक्तों के भाव के भूखे होते हैं। भक्त जिस श्रद्धा और प्रेम से भगवान को याद करता है, भगवान उसी भाव को स्वीकार करते हैं। यह बातें रविवार को पूज्य सत्यानंद जी महाराज ने नारायण वाटिका में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के दौरान कहीं।

कर्तव्य पथ ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित कथा में महाराज जी ने भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं और उनके दिव्य जीवन का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने भगवान शिव के स्वरूप, उनके आदर्शों और महिमा पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को शिव भक्ति के साथ धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

महाराज जी ने कहा कि भगवान शिव सरलता और सहजता के प्रतीक हैं। सच्चे मन से की गई भक्ति और श्रद्धा भगवान को प्रिय होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में अच्छे विचार अपनाने, धर्म के मार्ग पर चलने और जरूरतमंदों की सेवा करने का आह्वान किया।

कथा के दौरान भगवान शिव की महिमा का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबे रहे। पूरे पंडाल में भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण किया।

कार्यक्रम में कर्तव्य पथ ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं पार्षद नीरज गुप्ता, राजेंद्र केसरवानी, कुमार नारायण, सुमित केसरवानी, सतीश केसरवानी, शैलेंद्र केसरवानी, दिलीप केसरवानी, पूर्व पार्षद रामबाबू केसरवानी, सत्या जायसवाल, विनोद सोनकर, निखिल केसरवानी, रंजीत केसरवानी, जय श्री केसरवानी, उर्मिला केसरवानी, सीमा आर्य, जय श्री जायसवाल, रेनू केसरवानी, साधना, रुचि गुप्ता, नीलिमा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।