प्रयागराज की गौशालाओं पर मंडलायुक्त सख्त, गोवंश की देखभाल में लापरवाही पर दी चेतावनी
डॉ. लोकेश एम ने साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, हरे चारे और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के निर्देश दिए। गोबर से गोबर गैस और कम्पोस्ट खाद तैयार कर गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया।
प्रयागराज, 02 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में संचालित गौशालाओं में गोवंश की बेहतर देखभाल और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए मंडलायुक्त डॉ लोकेश एम ने कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि गोवंश के संरक्षण और उनकी देखरेख में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गोशालाओं में साफ-सफाई, चारा, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शिवनाथ यादव ने शुक्रवार को बताया कि मंडलायुक्त के निर्देश पर जिले की सभी गौशालाओं में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।गौशालाओं में गोबर के उचित प्रबंधन के लिए उसे एक स्थान पर एकत्र करने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। गोबर से गोबर गैस और कम्पोस्ट खाद तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। इससे गौशालाओं की स्वच्छता के साथ-साथ अतिरिक्त आय के साधन भी विकसित हो सकेंगे।
उन्होंने बताया कि गौशालाओं में नियमित सफाई सुनिश्चित करने के साथ गोवंश के लिए स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था रखने को कहा गया है। गोवंश के लिए हरे चारे और भूसे की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि उन्हें पर्याप्त और पौष्टिक आहार मिल सके। सभी गोशालाओं में मौजूद गोवंश का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
डॉ. शिवनाथ यादव ने बताया कि मृत गोवंश के शव का निर्धारित प्रक्रिया के तहत मिट्टी में उचित निस्तारण किया जाएगा। इससे गोशालाओं के आसपास स्वच्छता बनी रहेगी और संक्रमण की आशंका भी कम होगी। गोशालाओं में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने पर भी जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र के रूप में ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। गोबर से कम्पोस्ट खाद और गोबर गैस तैयार करने सहित आय के अन्य साधनों को विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे गोशालाओं के संचालन में आने वाले खर्च को पूरा करने में मदद मिलेगी।
मंडलायुक्त के निर्देशों के अनुपालन में संबंधित अधिकारियों और पशु चिकित्सा विभाग की टीमों द्वारा गौशालाओं की व्यवस्थाओं की निगरानी की जाएगी। उद्देश्य है कि प्रत्येक गौशाला में गोवंश को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।