प्रयागराज में पप्पू यादव के खिलाफ राष्ट्रीय परशुराम सेना का प्रदर्शन, पुतला दहन कर सदस्यता रद्द करने की मांग
प्रयागराज में राष्ट्रीय परशुराम सेना और ब्रह्मवाहिनी के कार्यकर्ताओं ने सांसद पप्पू यादव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया
प्रयागराज। बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव द्वारा संसद परिसर में कथित रूप से पौराणिक पात्रों और साधु-संतों के वेश में किए गए प्रदर्शन के खिलाफ प्रयागराज में विरोध के स्वर बेहद तीखे हो गए हैं। शनिवार को 'राष्ट्रीय परशुराम सेना' और 'ब्रह्मवाहिनी' के संयुक्त तत्वावधान में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन करते हुए सांसद पप्पू यादव का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने सांसद के इस कृत्य को सनातन परंपराओं, साधु-संतों और धार्मिक आस्था का गंभीर अनादर करार देते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द करने और उन्हें गिरफ्तार करने की जोरदार मांग उठाई।

गगनभेदी नारों के साथ हुआ पुतला दहन
शनिवार को प्रयागराज के एक प्रमुख चौराहे पर एकत्र हुए राष्ट्रीय परशुराम सेना और ब्रह्मवाहिनी के कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और झंडे लेकर पप्पू यादव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। "सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान" और "पप्पू यादव मुर्दाबाद" जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने सांसद के प्रतीकात्मक पुतले को आग के हवाले किया और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

"पप्पू यादव ने रावण और कालनेमि जैसा स्वांग रचा"
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित विमल तिवारी ने मीडिया और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सांसद पप्पू यादव पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा:
"संसदीय लोकतंत्र में अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने के कई संवैधानिक तरीके हैं। लेकिन लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर 'संसद' में सनातन धर्म के पूज्य साधु-संतों के वेश का दुरुपयोग करना और कालनेमि व रावण जैसे छद्म पौराणिक पात्रों का स्वरूप धारण कर स्वांग रचना घोर आपत्तिजनक है। पप्पू यादव ने केवल एक राजनीतिक नौटंकी नहीं की है, बल्कि विश्व भर के करोड़ों सनातनियों और संत समाज की भावनाओं को गहरा आघात पहुंचाया है।"
राष्ट्रीय सुरक्षा पर चुप्पी और धर्म के नाम पर राजनीति पर सवाल
पंडित विमल तिवारी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि जब देश में गंभीर आतंकवादी घटनाएं घटती हैं या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दे सामने आते हैं, तब इस प्रकार का विरोध या नाटक देखने को नहीं मिलता। परंतु, सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए पवित्र भगवा वस्त्र और साधु वेश का उपहास उड़ाया जा रहा है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी मानसिक विकृति और सनातन संस्कृति को नीचा दिखाने का प्रयास बताया, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
महामहिम राष्ट्रपति से की गई ये तीन प्रमुख मांगें:
प्रदर्शन के उपरांत संगठन के पदाधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें की गईं:
- लोकसभा सदस्यता की समाप्ति: संसद की गरिमा और सनातन धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में पप्पू यादव की लोकसभा सदस्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त की जाए।
- आपराधिक मुकदमा और गिरफ्तारी: धार्मिक भावनाओं को आहत करने (धारा 295A व अन्य प्रासंगिक धाराओं) के तहत सांसद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जाए।
- संसदीय आचार संहिता में कड़ाई: संसद परिसर में धार्मिक वेशभूषा या पौराणिक पात्रों का उपहास उड़ाने वाले किसी भी प्रकार के प्रदर्शन पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगाया जाए।
देशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी

राष्ट्रीय परशुराम सेना और ब्रह्मवाहिनी के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार, लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित प्रशासन इस मामले में शीघ्र कड़ा संज्ञान नहीं लेते हैं, तो यह आंदोलन केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन द्वारा इस मुद्दे को लेकर पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से उग्र व व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रदर्शन में मुख्य रूप से मौजूद रहे पदाधिकारी
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय परशुराम सेना और ब्रह्मवाहिनी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से जयवर्धन त्रिपाठी, आशुतोष पांडेय, शिवम शास्त्री, अनुराग दुबे, राहुल शुक्ला, आलोक तिवारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय विप्र बंधु और युवा शामिल थे।

