DFC से बदल रहा भारत का माल परिवहन, 2,843 KM के रेल नेटवर्क से उद्योग-व्यापार को मिली नई रफ्तार
ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से तेज और अधिक क्षमता वाला माल परिवहन संभव हुआ है। तीसरे DFC की घोषणा से देश के पूर्वी-पश्चिमी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होने की उम्मीद है।
प्रयागराज, 06 सितंबर । देश की माल परिवहन व्यवस्था को अधिक तेज, सक्षम और आधुनिक बनाने में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रमुख औद्योगिक, विनिर्माण और व्यापारिक केंद्रों को बंदरगाहों तथा महत्वपूर्ण माल परिवहन केंद्रों से जोड़ने वाले इन समर्पित रेल गलियारों के परिचालन से माल ढुलाई के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। वर्तमान में देश में दो प्रमुख डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर संचालित हैं।
उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) लगभग 1,337 किलोमीटर लंबा है। यह पंजाब के न्यू साहनेवाल से शुरू होकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश से गुजरते हुए बिहार के न्यू सोननगर तक जाता है। वहीं वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) लगभग 1,506 किलोमीटर लंबा है। यह उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से शुरू होकर हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से होते हुए महाराष्ट्र के न्यू जेएनपीटी तक पहुंचता है।
इस प्रकार दोनों गलियारे मिलकर लगभग 2,843 किलोमीटर लंबा समर्पित रेल माल परिवहन तंत्र तैयार करते हैं। इनके माध्यम से देश के प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों को महत्वपूर्ण माल केंद्रों तथा बंदरगाहों से बेहतर रेल संपर्क मिल रहा है।
दोहरी परत वाले कंटेनर परिवहन को मिली मजबूती
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक दोहरी परत वाले कंटेनर मालगाड़ियों का संचालन है। अधिक क्षमता वाली इन ट्रेनों के माध्यम से बड़ी मात्रा में माल को अपेक्षाकृत तेज गति से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा रहा है। इससे बंदरगाहों तक माल पहुंचाने की क्षमता बढ़ी है और आपूर्ति शृंखला को भी मजबूती मिली है।
डीएफसी पर मालगाड़ियों के लिए अलग रेल मार्ग उपलब्ध होने से माल परिवहन अधिक व्यवस्थित हुआ है। इससे सामान्य रेल मार्गों पर मालगाड़ियों का दबाव कम करने में भी सहायता मिल रही है। इसका सीधा लाभ यात्री रेल सेवाओं को मिलता है, क्योंकि मौजूदा रेल मार्गों पर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने से यात्री ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
तीसरे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की भी घोषणा
देश में माल परिवहन के नेटवर्क को और विस्तार देने की दिशा में बजट में तीसरे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की गई है। प्रस्तावित यह गलियारा पश्चिम बंगाल के दानकुनी से शुरू होकर झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से होते हुए गुजरात को जोड़ेगा। इससे देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच माल परिवहन संपर्क और मजबूत होने की उम्मीद है।
नए गलियारे के विकास से औद्योगिक क्षेत्रों, खनिज उत्पादक राज्यों, विनिर्माण केंद्रों और बंदरगाहों के बीच माल की आवाजाही को और अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी। इससे देश की समग्र लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
रेल माल परिवहन को मिल रहा आधुनिक स्वरूप
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर केवल मालगाड़ियों की गति और क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये देश की पूरी आपूर्ति शृंखला को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हैं। तेज और विश्वसनीय माल परिवहन से उद्योगों को कच्चा माल और तैयार उत्पाद समय पर पहुंचाने में सुविधा मिलती है। इससे परिवहन समय में कमी, माल ढुलाई की दक्षता में सुधार और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना बढ़ती है।
उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारतीय रेल के माल परिवहन तंत्र को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। उन्होंने कहा कि समर्पित माल गलियारों के माध्यम से मालगाड़ियों के लिए अलग और उच्च क्षमता वाला रेल मार्ग उपलब्ध हुआ है, जिससे माल की तेज एवं सुगम आवाजाही संभव हो रही है। इससे मौजूदा रेल मार्गों पर माल यातायात का दबाव कम होने के साथ यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होती है।
उन्होंने कहा कि डीएफसी के विस्तार से देश के औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिल रहा है तथा बंदरगाहों तक माल की पहुंच अधिक प्रभावी हो रही है। यह व्यवस्था भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करने और देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
कुल मिलाकर, ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारत के माल परिवहन तंत्र को आधुनिक, तेज, सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना के रूप में उभर रहे हैं। इनके विस्तार और नए गलियारों के विकास से आने वाले समय में देश में माल परिवहन और आपूर्ति शृंखला की दक्षता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।